झुंझनूं जिले के चिड़ावा कस्बे में करीब 13 साल पुराने मुनीम लूट प्रकरण में एडीजे कोर्ट ने दो अभियुक्तों को सात-सात साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस मामले में दो आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
सहायक लोक अभियोजक विनोद कुमार वर्मा के मुताबिक 17 दिसंबर 2004 को ओमप्रकाश व्यास ने चिड़ावा थाने में रिपोर्ट दी थी कि वह एक व्यापारी के यहां पर मुनीम का काम करता है। रोज वह पैसे जमा करवाने के लिए बैंक जाता है।
घटना के दिन भी वह बैग में करीब 70 रुपए लेकर बैंक में जमा करवाने जा रहा था कि डालमिया स्कूल के पीछे की गली में दो अज्ञात युवकों ने उसे धक्का मारकर गिराया और रुपयों से भरा बैग लेकर बाइक पर फरार हो गए।
इस मामले में पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद तफ्तीश शुरू की और इस मामले में तीन जनों को गिरफ्तार किया था। इसमें हरियाणा के तोशाम जिले के बिरण गांव के राजेश सैनी, हरियाणा के ही पीपली वाली जोहड़ी नई बिस्त भिवानी के शंकर ब्राह्मण तथा चिड़ावा के प्रदीप स्वामी को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ चालान पेश किया था।
एडीजे प्रेमप्रकाश गुप्ता ने सुनवाई के बाद अभियुक्त राजेश और शंकर को सात-सात साल की सजा सुनाई है। वहीं प्रदीप स्वामी और नरेन्द्र उर्फ़ नरेश को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।