जाली नोट मामलों की विशेष अदालत ने जाली नोट रखकर भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले अभियुक्त महावीर और कयूम को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है।
सजा के साथ ही अदालत ने प्रत्येक अभियुक्त पर तीन हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नकली नोटों का चलन किस कदर बढ़ा है कि भारत सरकार को हजार और पांच सौ के नोटों का चयन बंद करना पड़ा। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि भरतपुर के नगर थाने के एएसआई को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने गत वर्ष 13 जून को कुम्हारावास तिराहे पर खड़े महावीर को पकड़ा। पुलिस को अभियुक्त की तलाशी में पचास हजार रुपए के जाली नोट मिले।
अभियुक्त ने पुलिस को बताया कि वह 25 हजार रुपए में कयूम से नोट खरीद कर लाया है। इस पर पुलिस ने कयूम के ठिकाने पर दबिश दी। जहां पुलिस को दो नकली नोट बरामद हुए। पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर अदालत में आरोप पत्र पेश किया।