मकर संक्रांति के मौके पर प्रदेश की राजधानी जयपुर में आज पतंगबाज अपने पूरे जोश पर है। सुबह से ही वो काटा-वो मारा का शोर गूंज रहा है, लेकिन पतंगबाजी का यह शौक बेजुबान परिंदों पर भारी पड़ रहा है।
मांझे की तेज धार से कटकर परिंदें घायल हो रहे हैं। राजधानी जयपुर में स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से कई स्थानों पर इनके इलाज की व्यवस्थाएं भी की गई है। सांगानेरी गेट स्थित शहर के एकमात्र पक्षी चिकित्सालय में मांझे की धार से कटकर आने वाले परिंदों का सिलसिला सप्ताहभर पहले से शुरू हो गया है, लेकिन दो-तीन दिन में तो यहां इनकी संख्या बढ़ गई। मिली जानकारी के अनुसार, पिछले तीन दिन में यहां सौ से अधिक कबूतर, आधा दर्जन चील जख्मी हालात में पहुंचे है।
स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से जलेबी चौक, रामनिवास बाग, बड़ी चौपड़, जौहरी बाजार में सांगानेरी गेट के पास रेस्क्यू काउंटर बनाए गए है। जहां इन घायल परिंदों को देखरेख के लिए लिया जा रहा है। मांझे की धार से कटकर बड़ी संख्या में परिंदें मर जाते है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सुबह और शाम को पंतगबाजी पर रोक भी लगा रखी है, लेकिन पतंगबाजी के जोश के सामने ये रोक बेअसर साबित हो रही है।