प्रदेशभर में आॅपरेशन मिलाप अभियान शुरू होने के पांच दिन बाद ही ये विवादों के घेरे में आ गया है। कोटा के व्यापारियों का कहना है कि पुलिस अभियान का असली मकसद से भटक रही है।
दरअसल, कोटा में पुलिस आॅपरेशन मिलाप के तहत गुमानपुरा क्षेत्र में बालश्रमिकों को मुक्त कराने गई। इस पर कार्रवाई का विरोध करते व्यापारी और बच्चों के परिजन थाने पहुंच गए। इन लोगों का कहना था कि आॅपरेशन मिलाप का असली मकसद गुम हुए बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाना है जबकि ऐसा नहीं हो रहा। इसके विपरीत पुलिस दुकानों पर मेहनत करके अपने घरवालों का पेट पालने वाले बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त करवा रही है। व्यापारियों ने बाल मजूदरी का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस या तो इन बच्चों के लिए ऐसी व्यवस्था करे कि ये फिर बाल मजदूरी के दलदल में नहीं फंसे या फिर इनके लिए रोजगार की अलग से व्यवस्था करे।
व्यापारियों का कहना था कि कुछ दिन बाद फिर से ये बच्चे काम की तलाश में इधर—उधर भटकने लगते हैं। इस दौरान कुछ बच्चों के परिजनों ने भी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि बच्चों से काम करवाना उनकी मजबूरी है। महंगाई के जमाने में घर खर्च नहीं चल पाता है। ऐसे में काम नहीं करें तो क्या करें। व्यापारियों ने तो यहां तक कह दिया कि आॅपरेशन मिलाप के नाम पर पुलिस को दिए गए टारगेट पूरे नहीं होने पर अभियान की दिशा ही बाल श्रमिकों को मुक्त कराने पर आकर टिक गई है।
गुमानपुरा दुकानदार संघ के अध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि बालश्रम और भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को मुक्त करवाया जा रहा है। यह सराहनीय कदम है। लेकिन पुलिस आॅपरेशन मिलाप के असल मकसद को भूलकर सिर्फ अपना टारगेट पूरा करने में लगी है।
उधर, मानव तस्करी विरोधी यूनिट कोटा के इंचार्च धर्मराज मीणा ने बताया कि हमारी टीम ने अब तक 81 बच्चों को बालश्रम और भिक्षावृत्ति से मुक्त करवाया है। जिसमें से 4 बच्चे ऐसे थे जो घर से भागकर आए थे और गुमशुदा थे। इन सब बच्चों को परिजनों से मिलवाया गया है।