फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईजी दिनेश एमएन से कहा, जांच अधिकारी एसओजी की छवि खराब कर रहे हैं

Thu, 17 Aug 2017 08:31 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
विज्ञापन
डेमो इमेज
विज्ञापन
राजस्थान हाईकोर्ट ने भरतपुर के सेवर थाना इलाके में हुई हत्या को आत्महत्या का रूप देने के मामले में हुई लचर जांच पर एसओजी के आईजी दिनेश एमएम को कहा कि ऐसे जांच अधिकारी के चलते ही एसओजी की छवि खराब हो रही है। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण की नए सिरे से जांच खुद के निर्देशन में कराने के आदेश देते हुए दो माह में जांच पूरी करने को कहा है। अदालत ने निचली अदालत को कहा है कि तब तक वह प्रकरण में कोई प्रभावी आदेश पारित ना करे।
विज्ञापन


न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश मृतक की नाबालिग पुत्री की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान आईजी दिनेश एमएन अदालत में पेश हुए। अदालत ने पूछा की क्या वे जांच से संतुष्ट हैं और क्यों न प्रकरण को सीबीआई को भेज दिया जाए। अदालत ने फांसी के फंदे की फोटो देखकर आईजी से सवाल किया कि इतनी ऊंचाई से यदि कोई लटकेगा तो दोनों सिरो से रस्सी खिचेंगी, फिर यहां रस्सी ढीली कैसे रह गई। जिसका आईजी कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे सके।

अदालत ने यह भी कहा कि जिस परिसर में आत्महत्या होना बताया गया है उसे भी तोड़ दिया गया, लेकिन जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में उसका जिक्र नहीं किया। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण की नए सिरे से दो माह में जांच पूरी करने के आदेश दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

याचिका में यह बताया

court
याचिका में अधिवक्ता अनुरूप सिंघी ने बताया कि याचिकाकर्ता से कुछ लोगों ने छेड़छाड़ करने के बाद उसके पिता तेजपाल की अक्टूबर 2014 में हत्या कर दी थी। इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को पंखे से लटका दिया। याचिका में कहा गया कि पंखे पर लटके शव के दोनों पांव घुटने से मुड़कर फर्श पर टिके हुए हैं। ऐसे में यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केवल पोक्सो अधिनियम में आरोप पत्र पेश किया है। इसलिए मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आईजी दिनेश एमएन को पेश होने के आदेश दिए थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें