अपने समय में माता के भजन सुनाकर लोगों को भक्ति रस से भर देने वाले गायक नरेन्द्र चंचल ने आज के दौर में सूफी गायकी के प्रति अपनी ओर से चिंता जाहिर की है।
विश्व विख्यात भजन सम्राट नरेन्द्र चंचल मंगलवार को अजमेर प्रवास पर रहे। चंचल आजाद पार्क में आयोजित भजन संध्या में शिरकत करने के लिए आए थे जिसके दौरान वह मीडिया से भी रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अपने आप को सूफी गायक बताने वाले गायक कलाकार आस्था का मजाक उड़ा रहे हैं।
भजन सम्राट नरेन्द्र चंचल ने कहा कि वह 1970 से मां के भजन गा रहे हैं। उन्हें यह विरासत में तो नहीं मिला, लेकिन अपनी मां की प्रेरणा से ही वह अब तक जगत जननी मां के भजन विश्व भर में गा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह केवल मात्र दस-दस रूपए लेकर कच्ची बस्ती के लोगों को इस कला का ज्ञान भी प्रदान कर रहे हैं जिससे कि वह भी कला में निपुण होकर माता की भक्ति करें।
चंचल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वह भी फिल्मी जगत की ओर आकर्षित हुए थे,लेकिन मां की भक्ति ने उन्हें वापस यहीं लाकर खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि सूफी तो अब कोई गाने वाले बचे ही नहीं है। अब जो भी अपने आपको सूफी गायक कहते हैं वह आस्था का मजाक उड़ा रहे हैं। अब सूफीज्म पर कोई गीत नहीं गाया जा रहा। अब सूफीज्म के नाम पर अश्लीलता तक परोसी जा रही है।