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Rajasthan: वंश बढ़ाने के लिए दुष्कर्मी को 15 दिन की पैरोल नहीं, हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

Sat, 19 Nov 2022 10:24 AM IST
रोमा रागिनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने अक्टूबर में एक फैसला दिया था, जिसमें बच्चा पैदा करने के लिए गैंगरेप के दोषी को 15 दिन पत्नी के साथ रहने की इजाजत दी थी। यह फैसला काफी सुर्खियों में रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट ने एक गैंगरेप के आरोपी को बच्चा पैदा करने के लिए 15 दिन पत्नी के साथ रहने की इजाजत दी थी। सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। 

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मीडिया रिपोर्टस के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बैंच ने ये स्टे ऑर्डर दिया। राज्य सरकार की तरफ से सीनियर एडवोकेट मनीष सिंघवी ने बताया कि सरकार की तरफ से कोर्ट में याचिका डालने के बाद शुक्रवार को इस पर सुनवाई हुई थी। जिसमें हमारी तरफ से दलील दी गई कि राइट टू पौरोल कोई मौलिक अधिकार नहीं है। उन्होंने दलील दी कि राजस्थान में यह पहला फैसला है, जिसमें  के किसी दुष्कर्म के दोषी को पैरोल मिली है। राजस्थान के पैरोल रूल्स के अनुसार रेप या गैंगरेप के मामलों में पैरोल नहीं मिल सकता और न ही ऐसे दोषियों को ओपन जेल में भेजा जा सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ ने पैरोल पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दी है।

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क्या है मामला
2019 में अलवर के हनीपुर के रहने वाले राहुल के खिलाफ 16 साल की नाबालिग के साथ गैंगरेप का केस दर्ज हुआ था। स्पेशल पॉस्को कोर्ट अलवर ने इस मामले में राहुल को दोषी मानते हुए 13 जून 2022 को 20 साल के कारावास की सजा सुनवाई थी। राहुल 30 अक्टूबर 2020 से जेल में बंद है, जबकि उसकी शादी साल 2018 में बृजेश देवी से हुई थी।

पत्नी ने लगाई थी याचिका
राहुल की पत्नी बृजेश देवी ने बच्चा पैदा करने के अपने मौलिक एवं संवैधानिक अधिकार का हवाला देते हुए अलवर के डीजी कोर्ट में 13 जुलाई 2022 को आपात पैरोल की याचिका लगाई। फिर कुछ दिन के इंतजार के बाद 20 जुलाई, 2022 को हाईकोर्ट में गुहाल लगाई। हाईकोर्ट में लगाई याचिका में 30 दिन की पैरोल देने की मांग की गई लेकिन हाईकोर्ट ने राहुल को 15 दिन के पैरोल पर छोड़ने का आदेश सुनाया।

ये याचिका राहुल की सजा के ठीक एक महीने बाद लगाई गई। याचिका में कहा गया कि पत्नी को प्रेग्नेंसी या दंपती को वंश बढ़ाने के लिए रोकना संविधान के आर्टिकल 14 और 21 की भावना के खिलाफ होगा। अलवर के डीजी कोर्ट में याचिका लगाने के बाद सात दिन तक सुनवाई का इंतजार किया, फिर इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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