विवाह स्थलों पर हादसा होने के बाद शायद अब तो सरकार और स्थानीय प्रशासन चेत जाएं? मामला केवल भरतपुर के सेवर का नहीं बल्की पूरे प्रदेश का है। प्रदेश की राजधानी में ही पूरे विवाह स्थल पंजीकृत नहीं है। इनमें से करीब साठ फीसदी ही हैं, जिनके पास नगर निगम की ओर से लाइसेंस रिन्यू करवाए हुए हैं। जब राजधानी में ही यह हालत है तो प्रदेश के दूसरे जिलों व कस्बों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जानकार बताते हैं कि विवाह स्थलों के लिए स्थानीय निकायों की ओर से जो नियम लागू किए जाते हैं, जिनके आधार पर लाइसेंस जारी किया जाता है, विवाहस्थल उनकी पालना ही नहीं करते। कुछ नियम तो ऐसे हैं जो बिल्कुल आधारभूत नियम है, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। इनमें से पहला नियम है विवाह स्थल पर अग्निशामक यंत्र के इंतजाम का। ऐसे गिने चुने ही मैरिज हॉल ही हैं, जहां अग्निशामक यंत्रों का इंतजाम है ही नहीं। ऐसे में अगर छोटी सी भी आग लग जाती है तो उस पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा। छोटी से चिंगारी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।
वहीं दूसरी तरफ पार्किंग को लेकर भी नियमों को दरकिनार कर मैरिज गार्डन चलाए जा रहे हैं। नियमों के मुताबिक विवाह स्थल का करीब पच्चीस फीसदी हिस्सा पार्किंग के लिए रिजर्व किया जाना चाहिए। ये नियम बस कागजों में ही है। अस्सी फीसदी से ज्यादा पार्किंग स्थल ऐसे हैं, जिनमें पार्किंग के लिए बमुश्किल ही जगह दी जाती है। गलियों, बाजारों और रास्तों पर पार्किंग की जाती है। जिससे न केवल यातायात बल्कि पैदल आने जाने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जहां तक बात विवाह स्थल पर बनने वाले ढ़ांचे की है, उसकी जिम्मेदारी किसी की नहीं। उसे अप्रूव्ड करने की औपरिचकता भर रहती है। न कोई जांच न कोई परख, सीधे ही अनुमति मिल जाती है। सेवर में हुआ हादसा भी संभवता इसकी परिणीती है
उधर हाल ही में जारी नियमों के मुताबिक प्रदेश में संचालित होटल, रेस्टोरेंट, मीट शॉप, विवाह स्थल सहित अन्य गतिविधियां जिनको नगरीय निकायों द्वारा लाइसेंस जारी किए जाते हैं, उन्हें अब लाइसेंस अवधि पूरी होने पर 30 दिन के अंदर लाइसेंस रिन्यू करवाना होगा। इस अवधि में लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाने पर 5 फीसदी लाइसेंस फीस की दर से पैनल्टी ली जाएगी। इसे लेकर हाल ही में स्वायत्त शासन निदेशालय की ओर से आदेश जारी किए है। आदेशों में 10 वर्ष का एकमुश्त लाइसेंस शुल्क देने वाले होटल व रेस्टोरेंटों को छूट देने का भी प्रावधान किया। इसमें 10 वर्ष का एकमुश्त जमा करवाने पर मूल राशि में 20 फीसदी की छूट दी जाएगी।
विवाह स्थलों को मिलने वाली इस तरह की छूट के बावजूद लाइसेंस रिन्यू करवाने में मैरिज गार्डन रूचि नहीं लेते हैं। दूसरी तरफ प्रशासन की ढिलाई के चलते मैरिज गार्डन मालिकों के हौंसले बुलंद हैं। नियमों को धत्ता बताने के बावजूद उनके कार्रवाई नहीं होती, कार्रवाई होती भी है तो फौरी तौर पर।