राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने राज्यपाल कलराज मिश्र की अनुमति के बाद राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारी जनेश सिंह तंवर को पपला गुर्जर प्रकरण में झूठे आरोप लगाकर 16 सीसी के नोटिस तहत निलंबित करने के मामले को अब गलत माना है और इस प्रकरण को समाप्त करने का निर्णय किया है। कार्मिक विभाग के संयुक्त शासन सचिव राजेंद्र सिंह कविया ने उनके सभी आरोपों को निराधार बताकर इस प्रकरण को समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं। कार्मिक विभाग के आदेश के बाद RPS ऑफिसर जनेश सिंह तंवर को पदोन्नति का लाभ प्राप्त हो सकेगा। इसके अलावा उन्हें आरपीएस की सुपर टाइम स्केल भी मिल सकेगी।
बहरोड़ थाने का है पपला प्रकरण
राजस्थान के गृह विभाग ने आरपीएस अधिकारी जनेश सिंह तंवर पर आरोप लगाते हुए पांच अक्टूबर 2020 को निलंबित कर दिया था। गौरतलब तलब है कि बहरोड़ थाने के पपला प्रकरण में जनेश सिंह तंवर को निलंबित करके आरोप पत्र जारी किया गया था। जिसे आधारहीन आरोप माना गया। उस समय आरपीएस अधिकारी जनेश सिंह तंवर वृत्ताधिकारी कामां जिला भरतपुर के पद पर कार्यरत थे।
क्या है पूरा मामला ?
अलवर के बहरोड़ थाने में चार साल फके एके-47 से गोलियां बरसाकर बदमाश पपला गुर्जर को छुड़ा ले जाने वाली विक्रम उर्फ पपला गुर्जर गैंग के तीन बदमाशों जगन खटाणा, सुभाष और महिपाल को पुलिस ने पकड़ा था। तीनों पर पपला गुर्जर को थाने से भागने में मदद करने की बात सामने आई। तीनों ने गैंग के बदमाशों को बाइक की मदद से अलग-अलग ठिकानों पर छोड़ा था। उन पर वारदात के बाद पपला की गैंग के लोगों को शरण देने का भी संदेह था।
इससे पहले इस मामले में पुलिस के दो हेडकांस्टेबलों को सेवा से बर्खास्त, एक पुलिस उप अधीक्षक, थानाधिकारी सुगन सिंह, एक हेड कांस्टेबल और एक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया था। तत्कालीन पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह ने बताया था कि हेड कांस्टेबल राम अवतार और हेड कांस्टेबल विजयपाल को सेवा से बर्खास्त किया गया है। क्षेत्र में पूर्व में वृत्ताधिकारी रहे जनेश सिंह तंवर, थानाधिकारी सुगन सिंह, हैड कांस्टेबल सुनील और कांस्टेबल कृष्ण कुमार को निलंबित किया गया है। वृत्ताधिकारी रामजीलाल को एपीओ किया गया है। बहरोड़ थाना क्षेत्र के शेष सभी 69 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया था।