दशहरे के मौके पर राजस्थान में कई जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन हुआ। गलियों में भी बच्चों ने रावण के पुतले जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व धूमधाम से मनाया।
राजधानी जयपुर में आदर्श नगर,स्थित दशहरा मैदान में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलाए गए। इससे पहले राम के स्वरूप दशहरा मैदान में शोभायात्रा के साथ पहुंचे। जय श्रीराम के जयकारों के बीच राम ने अग्नि बाण छोड़ा और रावण दहन किया। जयपुर में मानसरोवर, कंवर नगर, रामलीला मैदान समेत शहर में कई जगह रावण दहन हुआ।
कोटा में भव्य दशहरा मेला आयोजित हुआ। यहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए। इस मौके पर रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। दहन से पूर्व यहां आतिशबाजी भी हुई। रावण दहन के समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
सांस्कृतिक राजधानी सूर्यनगरी जोधपुर में भी दशहरा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। गोधूलि बेला में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, महापौर घनश्याम ओझा, पूर्व नरेश गजसिंह सहित अतिथियों ने रावण का चबूतरा मैदान पर रावण और उसके परिजनों के पुतलों का दहन किया। इस दौरान भव्य आतिशबाजी हुई। इससे पहले मेहरानगढ़ फोर्ट में पूजा अर्चना के बाद पारंपरिक भगवान राम की सवारी निकाली गई।
अलवर में विजय दशमी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर पुरुषार्थी समाज द्वारा दशहरा मैदान में 51 फुट के रावण के पुतले का दहन किया गया ।अलवर के अशोका टॉकीज के समीप स्थित पुरुषार्थी धर्मशाला से भगवान राम की सवारी निकली जिसे अलवर शहर विधायक बनवारी लाल सिंघल ने झंडी दिखाकर रवाना किया। यह सवारी शहर के मुख्य सड़क मार्गों से होती हुई दशहरा मैदान पहुंची, जहां राम लक्ष्मण के पात्रों ने रावण कुंभकरण और मेघनाद के पुतले का दहन किया।