राजस्थान हाईकोर्ट ने एक दायर याचिका की सुनवाई करते हुए दुष्कर्म पीड़िता को सशर्त गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने हालांकि कहा कि गर्भपात हो सकता है या नहीं यह मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा। लेकिन कोर्ट का कहना था कि एमटीपी एक्ट 1971 के तहत गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है। गौरतलब है कि एक दुष्कर्म पीड़िता ने याचिका दायर 12 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने की इजाजत मांगी थीं। इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायधीश मनीष भंडारी ने एक मेडिकल बोर्ड के गठन के आदेश देत हुए उसे तीन दिन में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि यदि चिकित्सक संतुष्ट है तो गर्भपात में कोई कानूनी परेशानी नहीं है। इससे पूर्व याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने पूर्व में एसीजेएम कोर्ट से गर्भपात की अनुमति मांगी थी लेकिन वहां उसका प्रार्थना पत्र खारिज हो गया था।