बाड़मेर में रिफाइनरी के काम के शुभारंभ कार्यक्रम के साथ ही राजस्थान में भाजपा ने विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कांग्रेस को जमकर कोसा और कहा कि पत्थर लगाकर जनता जनार्दन की आंखों में धूल झोंकना कांग्रेस का स्वभाव है।
गौरतलब है कि राजस्थान में इस साल दिसंबर में विधानसभा चुनाव है और पीएम मोदी का आज पचपदरा में दिया भाषण पूरी तरह चुनावी भाषण था। मोदी ने कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर को लेकर जमकर राजनीतिक प्रहार किए। उन्होंने कहा कि बाड़मेर की रिफाइनरी ही नहीं और भी कई योजनाएं और घोषणाएं जिनमें कांग्रेस ने अपने शासन के दौरान पत्थर लगाकर लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है।
मोदी ने कहा कि कांग्रेस चालीस साल से गरीबी हटाओ का नारा दे रही है, लेकिन इसको लेकर कोई योजना नहीं बनाई। गरीब के नाम पर चुनावी खेल खेला जाता रहा है। गरीब हटाने की बात कांग्रेस केवल बातों में कहती रहीं। गरीबी हटाने के लिए कुछ नहीं किया। सत्ता में आने के बाद जनधन योजना शुरू की। पहले रसोई गैस के लिए सांसद और नेताओं के चक्कर लगाने पड़ते थें। अब ऐसा नहीं है। उज्ज्वला योजना से गरीब के घर चूल्हा जलने लगा है।
वन रैंक वन पेंशन योजना से छलावा
pm in rajasthan
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने सेना में वन रैंक वन पैंशन योजना योजना लागू करने की घोषणा की। इसके लिए बजट में 500 करोड़ का प्रावधान रखा।
मोदी ने कहा कि जब वे सत्ता में आए तो उन्होंने इस बारे में आकलन किया। चौंकाने वाली बात सामने आई कि कांग्रेस ने बजट में 500 करोड़ रुपए तो लिख दिए, लेकिन कितना आर्थिक बोझ आएगा, इस घोषणा को कैसे पूरा किया जाएगा और कब तक यह लागू होगी, इसका कहीं उल्लेख नहीं था। बस, अफरा—तफरी में इसे लागू कर दिया। जब वास्तविक आकलन किया तो इस पर 12 हजार करोड़ का बोझ आने की बात सामने आई, जो सरकार के लिए असंभव था। ऐसे में सेना अधिकारियों से राय लेकर इसे चार किस्तों में देने का तय हुआ, ताकि जन कल्याण की दूसरी योजनाएं प्रभावित नहीं हो। अब तक 10 हजार चार करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं।
रेलवे की 1500 योजनाओं का अतापता नहीं
pm in rajasthan
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद उन्होंने जब रेल बजट के बारे में जानकारी ली तो बड़ी गंभीर बात सामने आई। सामने आया कि 1500 से ज्यादा घोषणाएं ऐसी थीं जिनका कोई नामोनिशान नहीं मिला।
रेल बजट के दौरान संसद में तालियां बजवाने के लिए ये घोषणाएं हुईं। हमने तय किया है कि घोषणाएं केवल वहीं की जाएंगी जो पूरी हो सके। इससे देश में धीरे-धीरे सही बोलने की ताकत आएगी।