राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जेडीए को निर्देश दिए हैं कि वह द्रव्यवती नदी के सन् 1955 से अब तक के बहाव क्षेत्र का रिकॉर्ड पेश करे। इसके लिए 22 मार्च तक का समय दिया गया है। अदालत ने रिकॉर्ड को सेटलमेंट कमिश्नर से सत्यापित करने को भी कहा है। वहीं, अदालत ने आगामी सुनवाई पर सेटलमेंट कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नांदजोग और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने यह आदेश पीएन मैंदोला व अन्य की ओर से दायर याचिकाओ पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि नदी के 48 किलोमीटर बहाव क्षेत्र के सन् 1955 की स्थिति के साथ ही सेटलमेंट मे बदले गए खसरा और वर्तमान हालातों को दर्शाते हुए सीएसआईआर व नीरी में दर्शाए गइ चौड़ाई को ध्यान में रखते हुए नक्शे को सुपर इंपोस करते हुए रिपोर्ट पेश की जाए।
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा ने जवाब पेश करने का समय मांगा। इस पर अदालत ने मामले की सुनवाई 22 मार्च को रखी है।