राजस्थान हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका में नोटिस जारी होने के बावजूद भी जेसीटीएसएल की एमडी आकांक्षा चौधरी की ओर से पक्ष नहीं रखने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने उनके खिलाफ दस रुपए के जमानती वारंट जारी करते हुए 17 फरवरी को पेश करने को कहा है।
अदालत ने आदेश की कॉपी मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव को भेजते हुए कहा है अफसरों की उपस्थित और अदालती आदेशों की पालना सुनिश्चित की जाए। न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश राजेशकुमार की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता आनंद शर्मा ने बताया कि याचिकाकर्ता ने जेसीटीएसएल में चालक पद पर आवेदन किया था, लेकिन उसे आपराधिक प्रकरण के लंबित होने का हवाला देते हुए नियुक्ति नहीं दी गई। प्रकरण में एकलपीठ ने 2 फरवरी 2017 को याचिकाकर्ता के पक्ष में आदेश दिया। इसके खिलाफ जेसीटीएसएल की ओर से पेश अपील को खंडपीठ ने खारिज कर दी। ऐसे में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में अवमानना याचिका पेश की गई।
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गत दिनों राज्य सरकार और एमडी आकांक्षा चौधरी को अवमानना नोटिस जारी किए थे। नोटिस तामील होने के बाद मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता पेश हुए, लेकिन आकांक्षा चौधरी न तो खुद पेश हुई और न ही उनकी ओर से कोई अधिवक्ता आया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए दस रुपए के जमानती वारंट जारी कर चौधरी को 17 फरवरी को पेश करने को कहा है।