राजस्थान में ट्रैक्टर ट्रोलियों के अवैध रूप से किए जा रहे वाणिज्यिक उपयोग को वैध बनाने का उपाय राजस्थान सरकार को 500 करोड़ रुपए से अधिक की आय देगा। अधिकारियों का अनुमान है कि प्रदेशभर से
राज्य सरकार ने ट्रैक्टर मालिकों से ट्रैक्टर की कीमत का एक प्रतिशत शुल्क लेकर इन्हें पंजीकृत करने का निर्णय किया है। इसके बाद इन ट्रैक्टर ट्रोलियों का वाणिज्यिक उपयोग हो सकेगा। राजस्थान सरकार भले ही इस निर्णय को किसान या ट्रेक्टर मालिक के हित का बता रही हो, लेकिन असल में सरकार का इससे अरबों में राजस्व बढ़ेगा। ट्रांस्पोर्ट डिपार्टमेंट राजस्थान सरकार के रेवेन्यू की व्यवस्था करना वाला बड़े डिपार्टमेंटों में से एक है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में राजस्थान सरकार के पास कोई आंकड़ा नहीं है कि राजस्थान में कितनी ट्रैक्टर ट्रोलियां दौड़ रही हैं।
हालांकि 1991 में इनकी संख्या 24 लाख बताई गई थी। इस आंकड़े के आधार पर परिवहन विभाग के अधिकारी मान रहे हैं कि 9 लाख कंडम हो गई होंगी, तो भी अब राजस्थान में 15 लाख के आस-पास ट्रैक्टर ट्रोलियां होंगी।
अधिकारी अनुमान लगा रहे हैं कि यदि ट्रैक्टर की कीमत 5 लाख मानी जाए, तो इस आधार पर ट्रोलियों को नियमित करने के लिए प्रति ट्रोली 5000 रुपए शुल्क लिया जाएगा। राजस्थान में 15 लाख ट्रोली मालिकों में से यदि 10 लाख ट्रोली मालिक ही ट्रोली का पंजीकरण करवाए, तो भी राज्य सरकार को 500 करोड़ रुपए की आय हो जाएगी।
गौरतलब है कि वर्तमान नियमों के तहत ट्रैक्टर ट्रोलियों का केवल कृषि कार्य के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन हर जगह ट्रैक्टर ट्रोलियों का वाणिज्यिक उपयोग होते हुए देखा जा सकता है। ट्रैक्टर ट्रोलियों के जरिए पत्थर, ईंटें, बजरी, मिट्टी, मार्बल, लकड़ियां आदि धड़ल्ले से ढोए जाते हैं, जबकि नियमों के तहत ये सभी वाणिज्यिक गतिविधियां अवैध हैं।