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सरकारी विज्ञापन भ्रष्टाचार मामले में उपनिदेशक को राहत नहीं, ये है मामला

Mon, 05 Feb 2018 03:16 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी विज्ञापनों के प्रसारण में हुए भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड में तैनात उप निदेशक अरुण कुमार जोशी को राहत देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने जोशी की आपराधिक याचिका को भी खारिज कर दिया है। न्यायाधीश बनवारी लाल शर्मा ने यह आदेश दिए।
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याचिकाकर्ता अरुण कुमार जोशी की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता के पास राजस्थान संवाद का कार्यभार उसके प्रबंधक प्रमोद पारीक के अवकाश पर रहने के कारण 4 अप्रैल 2013 से 18 अप्रैल 2013 तक था। इस दौरान निदेशक स्वायत्त शासन की ओर से उन्हें पत्र जारी कर मैसर्स क्रेयांस एडवरटाइजिंग लिमिटेड के पक्ष में आदेश जारी किया गया था। इसके अलावा न तो कोई बिल जारी हुआ था और ना ही उस समय कोई भुगतान किया गया। मामले में दर्ज एफआईआर में भी याचिकाकर्ता का नाम नहीं है।

ऐसे में याचिकाकर्ता के स्तर तक एफआईआर को रद्द किया जाए। जिसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यह मामला संस्थानिक भ्रष्टाचार का है। जिसमें कई लोग शामिल है। याचिकाकर्ता के पास जब राजस्थान संवाद के प्रबंधक का चार्ज था, उस समय राजस्थान संवाद ऑपरेशन मैनुअल के अनुसार कोई भी कार्य आदेश जारी करने से पूर्व उनको यह सुनिश्चित करना था कि मैसर्स क्रेयांस एडवरटाइजिंग लिमिटेड जयपुर में प्रसारण के लिए सक्षम और अधिकृत है या नहीं।
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सरकार ने कहा ये

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राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि स्थानीय निकाय की ओर से जारी पत्र के अनुसार 175 केबल नेटवर्क को आदेश जारी करने थे, लेकिन याचिकाकर्ता ने इसके स्थान पर केवल क्रेयांस को ही आदेश जारी किया, ताकि इन सबके नाम की राशि एक को ही प्राप्त हो सके।

राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि जब मामला संस्थानिक भ्रष्टाचार का होता है तो यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसकी कितनी भूमिका रही है। इसके अलावा प्रकरण में जांच विचाराधीन है, इसलिए याचिकाकर्ता याचिका को खारिज किया जाए।
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पूरा मामला है ये, जानिए

मामले के अनुसार शंकर लाल गुर्जर ने वर्ष 2014 में एसीबी में मामला दर्ज कराया था कि क्रेयांस  विज्ञापन एजेंसी के मालिक अजय चोपड़ा ने राज्य सरकार के अधिकारियों से मिलीभगत कर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के विज्ञापनों के फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपए का घोटाला किया है।

राज्य सरकार के विज्ञापन के प्रचार प्रसार हेतु जनसंपर्क विभाग में एमपैनल्ड विभिन्न विज्ञापन एजेंसियों में से क्रेयांस को 90 फीसदी विज्ञापन दिए गए। एफआईआर पर कार्रवाई करते हुए एसीबी ने अजय चोपड़ा सहित अन्य लोगों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया। जबकि कुछ अन्य लोगों के खिलाफ वर्तमान में जांच लंबित चल रही है।
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