अपनी मांगें मनवाने के लिए ये किसान पेड़ पर उल्टे लटके। मुर्गें भी बने और घास भी खाई, लेकिन सरकार ने अभी तक इनकी सुध नहीं ली।
अनोखा ये किसान आंदोलन राजस्थान के बूंदी के कलेक्ट्रेट पर चल रहा है। किसान खेत मजदूर कांग्रेस के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में आसपास के कई गांवों के किसान शामिल हुए। आज भी यहां धरना दिया और प्रदर्शन के बाद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में किसानों ने अब उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। किसानों ने कहा है कि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इन मांगों को लेकर किया जा रहा है ये आंदोलन
पेड़ पर उल्टे लटककर विरोध करते किसान वहीं दूसरी तरफ मुर्गा बनकर जताया विरोध
- फोटो : Amar Ujala
दरअसल, ये किसान अपनी फसल बचाने के लिए पानी की मांग कर रहे है। बूंदी जिले के दयालपुरा, दौलाडा, सामरबा, औंकारपुरा डिस्ट्रिब्यूटरियों के नयागांव, नंदपुरा, गुवाड़ी, भैरूपुराओझा, बम्बोरी, गोबरिया, रायथल आदि गांवों के किसानों का आरोप है कि बूंदी ब्रांच कैनाल के टेल क्षेत्र में नहरी पानी नहीं पहुंच रहा है।
इन इलाकों की डिस्ट्रिब्यूटरियों में 7 जनवरी से पानी बंद किया हुआ है और 65 दिन की फसल को दूसरा पानी नहीं मिल पाया है। जिसकी वजह से फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई है। ज्ञापन देने वालों में राजेंद्र मीणा, सेवादल के जिला मुख्य संगठक मेहमूद अली, गोबरीलाल, शंभूलाल, कालूलाल, रामप्रकाश, गौरीशंकर, कैलाश मीणा, सत्यनारायण, गिरिराज, मुकुटबिहारी, बिरधीलाल, रामलाल, फोरूलाल, पन्नालाल, हंसराज, अनिल, गंगाराम, देवराज, छोटूलाल, विनोद जांगिड़, रामस्वरूप, महावीर आदि मुख्य रहे।