जवाहर कला केंद्र में कठपुतली कला की सीखने वाले प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। यूनिमा इंडिया की ओर से आयोजित सातवीं मास्टर क्लास के प्रतिभागियों ने कठपुतली कला की शानदार प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में पारम्परिक कठपुतली कला के साथ ही नई तकनीकों का बेहतरीन उपयोग देखने को मिला। प्रस्तुति के साथ ही प्रतिभागियों ने मास्टर क्लास के अनुभव भी शेयर किए।
पुरानी कला और आधुनिक तकनीक के बीच सामंजस्य के जरिए कई पौराणिक प्रसंग प्रस्तुत किए गए। इन प्रसंगों में सीता हरण, पूतना वध जैसी पौराणिक घटनाएं दिखाईं गई।
नई तकनीक के तहत परम्परागत धागे के स्थान पर क्रॉस का उपयोग, चमड़े और लकड़ी जैसी सामग्री का उपयोग, प्रकाश का ओवरहेड इफेक्ट एवं कठपुतली में मूवमेंट का प्रयोग इस शो में शामिल किए गए।
गौरतलब है कि मास्टर क्लास के दौरान प्रतिभागियों को कठपुतली कला शिक्षण की समसामयिक तकनीकों के बारे में जानने का अवसर भी प्राप्त हुआ। शो के प्रतिभागियों में पश्चिम बंगाल के जगन्नाथ सिंह, महाराष्ट्र के चेतन गंगावाणे, केरल के राजीव पुल्लावर व हरिदास तथा कर्नाटक के दर्शन एवं प्रवीण शामिल किए गए। दिल्ली की कंटम्प्रेरी पपेट मास्टर दादी डी पुदुमजी की ओर से प्रतिभागियों को मास्टर क्लास में प्रशिक्षण दिया गया था।