सरकार जहां जैसलमेर किले में बढ़ रहे खतरे को देखते हुए इसे खाली करवाने की कवायद में जुटी हुई है, वहीं दूसरी ओर लोगों ने सरकार की इस मंशा का विरोध शुरू कर दिया है। सरकार का कहना है कि किला खाली करो, तो दूसरी ओर यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि यह किला हमारी मां है।
जैसलमेर किले को खाली करने को लेकर सरकार और लोग आमने-सामने हैं। दरअसल, जैसलमेर दुर्ग में पानी रिसाव की समस्या और यहां दीवारें कमजोर होने के चलते खतरा बढ़ रहा है। ऐसा यहां विशेषज्ञों ने दुर्ग की जांच करने के बाद बताया। इसके बाद इस दुर्ग की आबादी को शिफ्ट करने को लेकर राज्य सरकार की एक टीम ने पिछले दिनों दुर्ग का सर्वे किया है।
साथ ही, मुख्यमंत्री के संकल्प पत्र में सोनार दुर्ग को खाली करवाने की भी योजना है। ऐसे में अब राज्य सरकार मुख्यमंत्री के संकल्प पत्र को लेकर योजनाओं पर युद्धस्तर पर काम कर रही है। इसी के चलते जैसलमेर के सोनार दुर्ग की आबादी को शिफ्ट करने की कवायद भी शुरू हो गई है।
इससे गुस्साए दुर्ग में रहने वाले लोगों ने बुधवार को पुरातत्व विभाग और नगर परिषद का घेराव किया। लोगों का कहना था कि यह किला हमारी मां है और हमारा जन्म भी यहां हुआ है मरेंगे भी यहीं। हालांकि, गुस्साए लोगों को बाद में विधायक छोटूसिंह ने मोबाइल पर बातचीत की तब जाकर मामला शांत हुआ।
दुर्गवासियों का कहना है कि यहां 500 घरों की आबादी निवास करती है। दुर्ग के अंदर मकानों में रहने वाले लोग निरंतर छोटी—मोटी रिपेयरिंग करवाते हैं और लगातार दुर्ग की सार—संभाल होती रहती है। यदि इसे खाली करवा दिया तो यह खंडहर बन जाएगा। दुर्ग को खाली करवाने के बारे में सोचना भी गलत है।
सरकार की यह मंशा सही नहीं है। अब तो सीवरेज भी बन चुकी है और पानी रिसाव की समस्या लगभग खत्म हो गई है। ऐसे में अब दुर्ग को किसी भी तरह का खतरा नहीं है।