देश की 112 महिलाएं जिन्हें दिल्ली में राष्ट्रपति ने सम्मानित किया है, उनमें से एक महिला ऐसी है जो 'सारी दुनिया' का बोझ उठाती है। अपने पति का बिल्ला बांधकर परिवार का पालन कर रही है।
हम बात कर रहे हैं यहां की एकमात्र महिला कुली मंजू की। मजबूरी में शुरू किया गया मंजू का ये सफर अब उनकी खास पहचान बन चुका है। बिल्ला नं. 15 बाजू पर बांधे बोझ उठाते मंजू को जो भी देखता है तारीफ किए बिना नहीं रह पाता। 178 पुरुष कुलियों में अकेली महिला कुली है मंजू। बॉलिवुड अभिनेत्री विद्या बालन के साथ मंजू एक चैनल के शो पर भी नजर आ चुकी हैं।
बिल्ले ने यूं दिखाई राह
मंजू
- फोटो : अमर उजाला
उनके संघर्ष की कहानी भी लंबी है। मंजू की शादी कुली महादेव से हुई थी। शादी के बाद सब ठीक ठाक चला। फिर उनके पति की तबीयत खराब रहने लगी। इसी के चलते पति की मृत्यु हो गई। ऐसे में तीन बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। मंजू पहले तो परेशान रही। फिर उन्हें याद आया अपने पति का बिल्ला नं. 15। इसी बिल्ले ने उन्हें आगे की राह दिखाई।
इस बारे में रेलवे अधिकारियों से बात हुई, तो उन्हें पति का लाइसेंस और काम करने की स्वीकृति मिली। अपने बुरे वक्त को पीछे छोड़ने के लिए मंजू ने इस बिल्ले को अपने बाजू पर बांधा और निकल पड़ी दुनिया को बोझ उठाने के लिए।
पुरुषों के बीच में बनाई अपनी जगह
मंजू
- फोटो : अमर उजाला
अब सवाल यह था कि एक छोटे से गांव हरसोली से निकलकर पुरुषों के दबदबे वाले कुली के काम में किस तरह अपना स्थान बना पाएंगी। यहां उन्हें पुरुष कुलियों का साथ भी मिला और पूरा सम्मान भी। इतने पुरुषों के बीच एक महिला को बोझ उठाते देख यात्रियों ने भी काम देना शुरू किया। कुलियों के लिए 50 किलो बोझ उठाने की सीमा तय है, मंजू इस सीमा तक बोझ उठा ही लेती हैं। हालांकि पहले उन्हें पुरुष साथियों से सहयोग नहीं मिला। धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो गया।
कुछ वक्त लगा पर इसके बाद रोजी रोटी का जुगाड़ भी होने लगा और मंजू का नाम जंक्शन और जयपुर शहर से बाहर भी फैलने लगा। मंजू का प्रसिद्धि बालीवुड तक पहुंची। जानी मानी अभिनेत्री विद्या बालान ने कलर्स पर अपने शो मिशन सपने में भी मंजू को दिखाया था। उन्होंने बताया था कि किस तरह एक महिला अपने सपनों को हिम्मत के साथ पूरा कर सकती है। अब मंजू शहर में संघर्ष और सफलता का नया नाम बन गई हैं।