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एक महीने में भाजपा ने खोए दो सांसद और एक विधायक,चुनावी दांव पेच भी अटके

Sun, 17 Sep 2017 10:58 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो
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राजस्थान में भाजपा के लिए शायद 'अच्छे दिन' नहीं चल रहे हैं क्योंकि पिछले डेढ़ माह में यहां पार्टी ने अपने दो सांसद,एक विधायक और एक बड़े नेता को खो दिया है। शनिवार देर रात दिल्ली के अपोलो अस्पताल में अलवर जिले के सांसद महंत चांदनाथ का बीमारी के चलते निधन हो गया।
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61 वर्षीय चांदनाथ ने साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के भंवर जितेन्द्र सिंह को हराया था। भंवर जितेन्द्र सिंह कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं। इससे पहले 9 अगस्त को अजमेर सांसद और किसान नेता सांवरलाल जाट का निधन हो गया था उसके 10 दिनों के भीतर  राज्य खाद्यी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष और पूर्व विधायक शंभूदयाल बडगूजर की भी बीमारी के चलते मौत हो गई थी।

गत 28 अगस्त को ही भीलवाड़ा जिले मांडलगढ़ से विधायक कीर्ति कुमारी का स्वाइन फ्लू की बीमारी से निधन हो गया था। बीते 1 महीने में इस राजस्थान के 4 वरिष्ठ भाजपा नेताओं की मौत से प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा गया है और अब दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव होंगे।
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कांग्रेस की इज्जत पर लगेगा दाव

अजमेर से पूर्व सांसद सचिन पायलट और अलवर के पूर्व सांसद भंवर जितेन्द्र सिंह
भले ही राजस्थान की दो लोकसभा सीटों से सांसद रहे भाजपा नेताओं का असामयिक निधन हो गया हो मगर उपचुनावों में कांग्रेस एक बार फिर से अपनी इज्जत बचाने का प्रयास करेगी। दरअसल अजमेर से सांसद रहे सांवरलाल जाट के निधन के बाद इस सीट पर कांग्रेस के सचिन पायलट चुनाव लड़ सकते हैं वहीं अलवर सीट से भंवर जितेन्द्र सिंह फिर से मैदान में उतर सकते हैं।

सचिन पायलट और भंवर जितेन्द्र सिंह दोनों ही कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बेहद ही करीबी माने जाते हैं। हालांकि पिछली बार दोनों ही नेता अपनी अपनी सीटों से चुनाव हारे थे जहां एक तरफ सांवरलाल जाट ने सचिन पायलट को हराया तो वहीं दूसरी ओर महंत चांदनाथ ने भंवर जितेन्द्र सिंह को हराकर अलवर लोकसभा सीट पर अपना कब्जा जमाया था। देखने वाली बात ये होगी कि अब क्या फिर से कांग्रेस इन्हीं दो नेताओं पर उपचुनावों में अपना दाव खेलती है या नहीं। 

 
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