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दो जोड़े में बेटी की विदाई, वो भी महज 17 मिनट में

Mon, 06 Mar 2017 11:15 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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निकाह - फोटो : अमर उजाला
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दो जोड़े में बेटी की विदाई करने की बात क्या सिर्फ जुमला है या फिर सच में ऐसा हो भी सकता है। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों ये जुमला सच होता दिखाई दे रहा है। ऐसा करने वालों में गरीब ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवार भी शामिल हैं। दरअसल राजस्थान के ग्रामीण परिवेश वाले इलाकों में नई पहल के तहत ऐसा हो रहा है।
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रविवार को ही इस तरह की एक शादी सम्पन्न हुई नवलगढ़ के मैणाम गांव में। शादी में दुल्हन पंकज कुमारी पुत्री सुभाष चन्द्र और चिड़ावा तहसील के सुलताना गांव के राधामोहन पुत्र दुलीचन्द परिणय सूत्र में बंधे। बड़ी बात ये रही कि ये शादी 17 मिनट में वेद मंत्रों से सम्पन्न करवाई गई। इस विवाह के गवाह संत कबीरदास के अनुयाई बने। सीमित लोगों की मौजूदगी में इस शादी में शिरकत करने वाले बंशीलाल दास ने बताया कि वेदों के प्रमाणित ज्ञान आधार अनुसार ऋगवेद मण्डल 8, सुक्त 46 व मंत्र 10 में ज्योति यज्ञ का प्रावधान है। जिसके मुताबिक यह विवाह पूरा हो गया।
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शादियों में नशा मुक्ति का संदेश भी

marriage - फोटो : अमर उजाला
इस तरह की पहल सीकर, झुंझुनूं, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर सहित करीब एक दर्जन जिले शामिल हैं, जहां शादियां बेहद साधारण तरीके से की जा रही है। इनमें न तो बड़ा शामियान होता है न ही डीजे की कानफोडू आवाज। न बेहद महंगे जेवरात होते हैं और न ही जीमण की लंबी लंबी पंगतें। महज कुछ मिनटों में ही शादी सम्पन्न हो जाती है। खर्चा होता है तो दुल्हा और दुल्हन के महज दो जोड़ी कपड़ों का, बस और कुछ नहीं। एेसा शादियों में हो रही फिजुलखर्ची को रोकने के लिए किया जा रहा है। इसका असर ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल भी रहा है। इससे लोगों पर कर्ज का भार भी कम हो रहा है।

इन शादियों की खास बात नशामुक्ति का संदेश भी है। जिस जगह शादी होती है, उसके बाहर ही एक बोर्ड लगा होता है, जिस पर साफ शब्दों में लिखा होता है कि यहां बीड़ी, गुटखा, सिगरेट, शराब सहित तमाम अन्य नशीले पदार्थों को लाने या नशा करने वाले को आने की अनुमति नहीं है। यह नियम वर और वधु दोनों पक्षों पर लागू होता है। इसके साथ ही उनसे नशा छोड़ने की अपील भी की जाती है।

 
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