राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, प्रमुख ऊर्जा सचिव और जेवीवीएनएल के चेयरमैन व एमडी को नोटिस जारी कर पूछा है कि ट्रांसफार्मरों में आए दिन होने वाले विस्फोटों को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है।
न्यायाधीश वीएस सिराधना और न्यायाधीश केसी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश शाहपुरा ट्रांसफार्मर कांड में अपनी मां और बेटी को खोने वाले श्योपत प्रजापत की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने अदालत को बताया कि हाल ही में शाहपुरा के पास ट्रांसफार्मर में विस्फोट के चलते करीब डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इससे पूर्व दो साल पहले टोंक में ही 16 लोग मारे जा चुके हैं। वहीं पिछले कुछ दिनों में कई जगहों पर ट्रांसफार्मर में विस्फोट की घटनाएं हो चुकी हैं।
जेवीवीएनएल के एमडी भी मान चुके हैं कि सालाना करीब साठ से सत्तर ट्रांसफार्मर में विस्फोट होते हैं। याचिका में कहा गया कि घटिया खरीद और लापरवाही के चलते ऐसी घटनाएं हो रही है। बिजली कंपनी ट्रांसफार्मर खरीदने के लिए पैसा खर्च करती है, वहीं दूसरी तरफ सरकार को पीड़ितों को मुआवजा भी देना पड़ता है।
याचिका में कहा गया कि ऐसा ट्रांसफार्मर लगाने वाली कंपनी को दंडित किया जाना चाहिए और दोषी अफसरों से भी वसूली होनी चाहिए। याचिका में गुहार की गई है कि एक्शन प्लान बनाकर सभी ट्रांसफार्मर की जांच की जानी चाहिए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।