राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद खिलाडी सैन्य अधिकारी को नकद पुरस्कार देने के बजाए 12 साल तक मामले को लटकाने पर आश्चर्य जताया है।
अदालत ने कहा कि यह बडी चौंकाने वाली बात है कि राज्य सरकार को 2005 में ही पुरस्कार राशि देनी चाहिए थी, लेकिन राशि देने की बजाए मामले में अपील कर दी गई। इसके साथ ही अदालत ने अपील को खारिज करते हुए दो माह में भुगतान करने के संबंध में एकलपीठ के दिए आदेश को सही माना है।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार और स्पोट्र्स कौंसिल की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए दिए। अधिवक्ता मोहित बलवदा ने बताया कि वर्तमान में मेजर जनरल नरपतसिंह राजपुरोहित अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। नरपतसिंह की ओर से अपने सैन्यकाल में दौरान कई अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। जिसके चलते सरकार की ओर से उन्हें अनुदान नियम,1986 के तहत 2 लाख 15 हजार रुपए के नकद पुरस्कार का भुगतान करना था।
भुगतान नहीं करने पर नरपतसिंह ने 1998 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर अदालत ने 2005 में आदेश देते हुए दो माह में पुरस्कार राशि देने के आदेश दिए। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार और खेल परिषद ने खंडपीठ में अपील दायर की। जिसे खारिज करते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को सही मानते हुए भुगतान करने के आदेश दिए हैं।