निर्भया कांड के दोषी मुकेश की मां का घर
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पूरे देश को हिला देने वाले बहुचर्चित निर्भया गैंग रेप कांड के दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सभी के दिलों को ठंडक दी है। इस कांड में शामिल दो सगे भाई करौली के हैं और यहां के लोगों में इस बात का काफी रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करौली के नाम पर धब्बा लगाने वालों को फांसी ही होनी चाहिए थी।
करौली निवासियों को इस बात का जरूर गम है कि दिल दहला देने वाले निर्भया कांड में शामिल यहां के दो दोषियों बड़ा भाई राम सिंह और छोटा भाई मुकेश ने करौली के नाम पर धब्बा लगा दिया है। लेकिन इस बात का कतई रंज नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की फांसी बरकरार रखी है। गौरतलब है कि जिस बस में ये कांड हुआ था, उसका ड्राइवर राम सिहं था और मुकेश खल्लासी। प्रकरण की सुनवाई के दौरान 11 मार्च 2013 को राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फंदा लगाकर जान दे दी थी।
करौली शहरवासियों ने दोनों दोषियों की करनी को अमानवीय बताते हुए फैसले का स्वागत किया तथा कहा कि दोषियों के कर्म ही फांसी लायक हैं। स्थानीय लोगों की भावना देशवासियों की तरह ही सामने आ रही है।
स्थानीय पार्षद अर्चना सेठी ने कहा कि ऐसे फैसलों से ही अपराधियों में डर की भावना पनपेगी और समाज में सुरक्षा की भावना जागेगी। ये फैसला महिला सुरक्षा की भावना बढ़ाने वाला और न्यायपालिका पर भी विश्वास बढ़ानेवाला साबित होगा।
करौली शहर निवासी संजय सिंह और रमेश जैन ने कहा कि अपराधियों को तो फांसी से भी कोई कड़ी सजा हो, तो वो मिलनी चाहिए। कोई भी निवासी नहीं चाहता था कि अपराधियों को किसी तरह की कोई रियायत मिले।
इधर, राम सिंह और मुकेश की 65 वर्षीय मां कल्याणी शहर से दूर कल्लादह में अपनी झोपड़ी में रह रही है। पति मांगीलाल माली की मौत तीन महीने पहले हो चुकी है। उसके झोपड़ी के आस-पास सन्नाटा है और मां को अपने बेटों पर पछतावा। मां के आसूं नहीं रुक रहे हैं।
घटना के दौरान दोनों भाई दिल्ली में रह रहे थे। दिल्ली में रह रहे लोगों ने बताया कि दोनों भाइयों की शराब पीकर हंगामा करने की आदत की वजह से लोग उनसे डरकर कन्नी काटते थे।