हत्या,लूट,चोरी,डकैती,नकबजनी,धोखाधड़ी,दुष्कर्म,छेड़छाड़ आदि जैसे मामलों को लेकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने अपने आंकड़े जारी किए हैं। ब्यूरो के रिकॉर्ड के अनुसार राजस्थान में सबसे ज्यादा झूठे मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं। इतना ही नहीं पिछले चार सालों में झूठे मुकदमे दर्ज कराने का आंकड़ा तेजी से बढ़ता भी गया है।
जानकारी के अनुसार एनसीईआरबी द्वारा जारी किए गए आंंकड़ों के अनुसार साल 2016 में प्रदेश में 1,80,398 में मुकदमे दर्ज हुए थे जिनमें से करीब 54,964 मुकदमे झूठे साबित हुए। साल 2014 में तो ये स्थिती और भी ज्यादा खराब थी जब करीब 2,10,418 मुकदमो में से 64,978 मुकदमे झूठे निकले थे। हालांकि ऐसे आंकड़े देखने के बाद राजस्थान पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए इनमें कमी लाने की पूरी कोशिश की नतीजतन इस साल झूठे मुकदमे कम ही दर्ज हुए।
राजस्थान में झूठे मुकदमे दर्ज होने से पुलिस पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। एक तो पुलिस पर काम का बोझ ज्यादा बढ़ता है और जो असली मामले होते हैं उन्हे निपटाने में पुलिस को काफी समय लग जाता है। इसके अन्य पहलुओं पर बात की जाए तो झूठे मामलों की वजह से पुलिस की परेड भी काफी ज्यादा हो जाती है वहीं कई परिवादियों को न्याय तक नहीं मिल पाता है।