राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से बीसीसीआई के खिलाफ दायर दावे को वापस लेने के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस संबंध में आरएस नांदू ने खुद को आरसीए का निर्वाचित सचिव बताते हुए कहा है कि महेन्द्र नाहर अनधिकृत व्यक्ति है। ऐसे में नाहर के प्रार्थना पत्र के आधार पर दावा वापस लेने की अनुमति नहीं दी जाए। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि वह आरसीए सचिव होने के नाते दावे पर सुनवाई जारी रखना चाहता है। इस पर एडीजे क्रम-4 अदालत ने दोनों पक्षों को जवाब पेश करने को कहा है। अदालत प्रकरण में बीस जुलाई को सुनवाई करेगी।
नांदू की ओर से पेश प्रार्थना पत्र में कहा गया कि वह स्वयं आरसीए का सचिव है। अदालत पूर्व में नाहर को आरसीए से अनधिकृत बताकर उसका दावा वापस लेने का प्रार्थना पत्र खारिज कर चुकी है। ऐसे में इस प्रार्थना पत्र को भी खारिज किया जाए।
गौरतलब है कि अदालत से दावा वापस लेने का प्रार्थना पत्र खारिज होने के बाद आरसीए के कार्यकारी सचिव महेन्द्र नाहर ने अध्यक्ष सीपी जोशी के उसे अधिकृत करने के पत्र के साथ अदालत में पुन: प्रार्थना पत्र पेश किया है। जिसमें कहा गया कि आरसीए बीसीसीआई के खिलाफ लंबित दावे को वापस लेना चाहता है। वहीं हाल ही में सीपी जोशी ने नवनिर्वाचित सचिव आरएस नांदू को हटाकर संयुक्त सचिव महेन्द्र नाहर को आरसीए का कार्यकारी सचिव बना दिया। इस पर नांदू की ओर से स्वयं को सचिव बताते हुए नाहर के प्रार्थना पत्र को अनधिकृत बताया है।