सथानीय लोगों की मदद से जेसीबी से टैंक को तोड़ा गया
- फोटो : amar ujala
उदयपुर में सेप्टिक टैंक हादसे के दौरान लोग मदद के लिए उदयपुर नगर निगम में फोन करते रहे। निगम की टीम मौके पर पहुंची तो आधे—अधूरे संसाधनों के साथ। जब तक लोगों ने अपने स्तर पर जेसीबी का इंतजाम किया और सेप्टिक टैंक तोड़ कर चारों मृतकों को बाहर निकाला।
उदयपुर में हुए दर्दनाक हादसे ने स्थानीय नगर निगम प्रशासन की पोल खोल कर रख दी। हादसे की पता चलते ही आसपास के लोग जमा हो गए और नगर निगम तथा जिला प्रशासन से मदद की गुहार करने लगे। निगम प्रशासन ने दो कर्मचारियों को मौके पर भेजा लेकिन उनके पास मास्क जैसे सुरक्षा उपकरण तक नहीं थे। वे वहां पहुंचे।
इनमें से होमगार्ड मोहम्मद हुसैन अपनी जान पर खेलकर सेप्टिक टैंक में उतरा लेकिन, वह बेहोश हो गया। उसे लोगों ने वापस खींच लिया। एम्बुलैंस से उसे अस्पताल भिजवाया। उसकी हालात गंभीर बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने ही निकाला फंसे हुए लोगों को
घायलों को भी स्थानीय लोगों ने ही पहुंचाया अस्पताल
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इसके करीब एक घंटे बाद एक दमकल मौके पर पहुंची लेकिन, उसमें आए दो बचावकर्मियों केे पास भी कोई साधन नहीं थें। वे इस तरह की घटनाओं से निपटने के प्रशिक्षित नहीं थें। तब लोगों ने अपने स्तर पर जेसीबी बुलाई और और मकान की दीवार तथा सेप्टिक टैंक को तोड़कर उसमें फंसे मजदूरों को बाहर निकाला।
अप्रशिक्षित लोगों को भेज दिया
बचाव के लिए जुटे आसपास के लोग
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पार्षद नानालाल बया तथा स्थानीय लोगों ने इस मामले में नगर निगम और स्थानीय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि रेस्क्यू टीम हादसों से निपटने के लिए प्रशिक्षित होती तो शायद इस हादसे में इतने लोगों की जान नहीं जाती। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन की टीम के नाम पर अप्रशिक्षित लोगों को भेज दिया।