दलित संगठनों ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कथित रूप से कमजोर करने के खिलाफ दो अप्रैल, 2018 को देशव्यापी बंद का आह्वान किया था और उस दौरान राज्य में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए थे।
राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने शुक्रवार को विधानसभा को आश्वस्त किया कि दो अप्रैल 2018 में विरोध-प्रदर्शन के दौरान दायर किए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे। गौरतलब है कि दो अप्रैल, 2018 को एससी-एसटी एक्ट को कमजोर करने को लेकर देशव्यापी बंद का आह्वान किया गया था और उस दौरान राज्य में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए थे।
विज्ञापन
दलित संगठनों ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कथित रूप से कमजोर करने के खिलाफ बंद का आह्वान किया था। जूली ने विधानसभा में मांग संख्या 51 (अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए विशिष्ट संघटक योजना) की अनुदान मांगों पर हुई बहस का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार वंचितों के साथ खड़ी है और उनके कल्याण के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बजट में कई गुना बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने सदन में आश्वस्त किया कि दो अप्रैल, 2018 के मामले में दायर किए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे। जूली ने बताया कि पालनहार योजना में पिछली सरकार ने अपने पहले तीन वर्षों में 278.15 करोड़ रुपये ही खर्च किए थे, जबकि वर्तमान सरकार द्वारा अभी तक 1,458 करोड़ रुपये खर्च कर बच्चों को मदद पहुंचाई गई है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि एससी-एसटी विकास कोष की राशि 100-100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 500-500 करोड़ रुपये की गई है। जूली ने दलित दूल्हों को घोड़ी पर नहीं चढ़ने देने की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों को रोका जाए। समाज में भेदभाव दूर किया जाए और दलित वर्ग के दूल्हों को घोड़ी पर चढ़ने में बाधा नहीं डाली जाए।’’
राज्य में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनमें सवर्णों ने दलित दूल्हों को बारात के दौरान घोड़ी की सवारी करने से रोक दिया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विद्यार्थियों के छात्रवृति संबंधित मामलों के निस्तारण के लिए नया पोर्टल तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इसकी शुरूआत होगी। इससे समस्याओं का तुरंत समाधान होगा।