एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे 21 साल के छात्र ने धौलपुर के एक पिछड़े गांव की कायापलट का बीड़ा उठाया है। ये छात्र इस गांव को उसका हक दिलाने के लिए सरकारी दफ्तरों से लेकर कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा रहा है।
जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे 21 वर्षीय अश्वनी पाराशर ने धौलपुर के राजघाट गांव की कायापलट करने की मुहिम चलाई है। यह गांव राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह जिले धौलपुर में जिला मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर चंबल नदी के किनारे बसा हुआ है। इस गांव में 350 लोगों की आबादी है।
राजघाट उस समय चर्चाओं में आया जब धौलपुर उप चुनाव के दौरान सूबे के मंत्री इस गांव में पहुंचे। आजादी के 70 साल बाद भी इस गांव में ना तो बिजली पहुंची और ना ही सड़क। आलम यह है कि इस गांव में पिछले 20 सालों में केवल दो बार ही शादी की शहनाईयां बज पाईं। कारण यह कि गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण कोई भी पिता अपनी बेटी इस गांव के लोगों को नहीं देता है।
छात्र अश्वनी ने बताया कि उप चुनाव के दौरान सरकार और तमाम मीडिया के धौलपुर में आने के बाद से राजघाट के हालातों की सुध ली गई और महज आश्वासन देकर ही मंत्रियों और अफसरों ने इतिश्री कर ली। हिम्मत ना हारते हुए अश्वनी ने बाद में पीएमओ को पत्र लिखकर गांव के हालातों से सरकार को रुबरु कराया।
जवाब में पीएमओ ने वित्त सचिव को मामले में संज्ञान लेने को कहा, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब अश्वनी और उसके साथियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एमबीबीएस छात्र की इस मुहिम से अब आईआईटी समेत दिल्ली,मुंबई,बैंगलोर और लखनउ तक के छात्र जुड़ रहे हैं वहीं अमेरिका और कनाडा में रह रहे एनआरआई लोगों ने भी गांव के विकास में मदद की पेशकश की है।