आप पार्टी से रूठे जाने माने कवि व पार्टी के नेता कुमार विश्वास दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दखल के बाद अब मान गए हैं। विश्वास का कद बढ़ाते हुए उन्हें राजस्थान का प्रभारी बना दिया गया है। लेकिन असल चुनौती कुमार विश्वास के सामने अब आएगी।
राजस्थान में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब और दिल्ली में हुए चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जो राजस्थान के कार्यकर्ताओं में जान नहीं फूंक सका। उल्टा कार्यकर्ता और सुस्त हो चुके हैं। कुल मिलाकर राजनीतिक पटल पर आप पार्टी की पहचान न के बराबर है। पार्टी संगठनात्मक स्तर पर काफी कमजोर भी है और अंदरूनी फूट की भी खबरें आती रहती हैं। विश्वास को यहां बीज रूपी आप पार्टी को सींचकर जनता के दिलों तक पहुंचाना सीधी पहाड़ की चढ़ाई के बराबर होगा।
राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस पार्टी के बीच सीधी टक्कर रहती है। आमजन के बीच अब तक तीसरी पार्टी कभी जगह नहीं बना पाई है। आप पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव में राजस्थान की 25 में से करीब 20 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन एक भी जीत के दरवाजे तक नहीं पहुंचा। हालांकि कुछ अपनी जमानत बचाने में कामयाब हो गए थे।
राजस्थान का अगला वर्ष चुनावी वर्ष है। कुमार विश्वास के पास करीब डेढ़ वर्ष है पार्टी को चुनावी रूप से तैयार करने के लिए। राजस्थान में पार्टी ने हाल ही सभी 200 विधानसभा सीटों पर प्रभारी लगाए हैं और पार्टी बूथ स्तर तक जाने की बात करती है।
आप के प्रदेश प्रवक्ता देवेंद्र शास्त्री ने कहा है कि राजस्थान में कुमार विश्वास के रूप में प्रभारी मिला है, जिनसे पार्टी को काफी उम्मीदें होंगी। विश्वास को पहले संगठन के मूलभूत ढांचे पर काम करना होगा। राजस्थान में तीसरे मोर्चे की काफी डिमाण्ड है, जिसे आप पार्टी पूरा करने में सक्षम है।