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पद्मावत विवाद पर भड़की ये एक्ट्रेस कहा 'किसको क्या देखना चाहिए ये कुछ चंद लोग तय नहीं कर सकते'

Fri, 26 Jan 2018 04:48 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल
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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन आज फिल्म पद्मावत का मुद्दा दिनभर छाया ही रहा और फिल्म को लेकर कई मेहमानों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी। आज जेएलएफ में आर्ट फिल्मों की जानी मानी अभिनेत्री नंदिता दास और बॉलीवुड एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने शिरकत की।
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अभिनेत्री नंदिता दास ने अपने सेशन कल्चरल करी में उनके द्वारा बनाई जा रही फिल्म 'मंटो' और पद्मावत के मुद्दे पर काफी चर्चा की। दास ने पद्मावत को लेकर गहराए विवाद पर कहा कि इस देश में कौन क्या देखे क्या ना देखे ये फैसला कुछ चंद लोग नहीं कर सकते। उन्होनें कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां सभी को अभिव्यक्ति की आजादी है और उसे खुलकर प्रस्तूत करने का अधिकार भी।

दास ने पद्मावत पर देशव्यापी बैन लगाने की मांग कर रहे राजपूत संगठनों को लेकर कहा कि संगठनों को सड़कों पर उतरकर तोड़फोड़ करने के बजाए लोगों से फिल्म को ना देखने की शांतिपूर्ण ढंग से अपील करनी चाहिए थी। उन्होनें कहा कि इतिहास पर आधारित पहले भी कई फिल्में आई हैं और प्रदर्शन कर रहे लोगों को बिना फिल्म देखे ये तय नहीं करना चाहिए कि इसमें विवादास्पद चीजें आखिर हैं क्या।
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महिलाओं को उनका अधिकार मिले वो दिन अभी काफी दूर है

सेशन के दौरान गुफ्तगु करती एक्ट्रेस नंदिता दास और एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी
दास ने अपनी अपकमिंग मूवी 'मंटो' और सादत हसन मंटो का ​किरदार निभा रहे एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी के बारे में बात करते हुए कहा कि 'वो आपकी जिंदगी का किरदार बन जाए,तो वो एक्टर के लिए सबसे बड़ी बात होती है, नवाज में गुस्सा और घमंड है जो मंटो में थे, मंटो दिल के बड़े अच्छे थे और नवाज का दिल भी बहुत बड़ा है। 


एक्ट्रेस नंदिता दास ने देश में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को लेकर कहा कि आज तो क्या भविष्य में भी कहीं दूर दूर तक वो दिन दिखाई नहीं देता जब हमारे देश में महिलाओं को उनके सही अधिकार मिलें ताकि वो पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकें। उन्होनें कहा कि ये महज एक सोच का अंतर है और जिस दिन ये सोच यथार्थ में बदल जाएगी उसी दिन से ये मान लिया जाएगा कि देश में महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ है। 
 
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