राजस्थान की राजधानी जयपुर में चौमूं सर्किल पर पिछले दिनों हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब सर्किलों को छोटा करने को लेकर बहस छिड़ गई है। शुक्रवार को जेडीए में आयोजित जयपुर ट्रेफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक में यह उठा, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका।
दरअसल जेडीए और ट्रेफिक पुलिस के पूर्ववर्ती अधिकारियों ने जयपुर के सर्किलों के बीच में लगी गुमटियां और मूर्तियां हटाने का निर्णय लिया था। उसके बाद शहर के अधिकांश सर्किलों के बीच लगी मूर्तियां और पुलिस की गुमटियां हटा दी। चौमूं सर्किल से भी मूर्ति को हटाया गया था। इसके चौराहे बड़े हो गए और यातायात सुधरने की बजाय एक्सीडेंट जोन बन गए।
अब शुक्रवार को जेडीए आयुक्त वैभव गालरिया की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इनका आकार घटाने पर चर्चा हुई। बैठक में छह और सर्किल जिनकी मूर्तियां हटाई जानी है पर भी विचार—विमर्श हुआ। इनमें परशुराम सर्किल, ज्योतिबा फूले सर्किल, राव शेखा सर्किल, अंबेडकर सर्किल समेत दो और सर्किल हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनो चौमूं सर्किल पर नमक ले जा रहा एक ट्रोला पास से गुजर रही कार पर पलट गया था और इस दर्दनाक हादसे में कार में बैठी पांच सवारियों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
ट्रेफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक में सीएम एडवाईजर कमेटी के निर्देश पर बीआरटी काॅरिडोर की उपयोगिता और सुरक्षित संचालन पर विचार किया गया। बैठक में जयपुर शहर में प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए एलपीजी आॅटो रिक्षा के परमिट संख्या का वर्ष 2019 तक के लिए निर्धारण किया गया।
बैठक में यह भी तय किया कि मेट्रो रेल स्टेशनों के आसपास विकसित पार्किंग में प्राइवेट बसों की पार्किंग को मंजूरी देने का भी निर्णय लिया। इससे ये वाहन सड़क पर नहीं खड़े हो सकेंगे। अजमेरी गेट स्थित भूमिगत पद-मार्ग को 45 दिन में पुनः चालू करवाने का निर्णय किया।