जयपुर में तैयार होता गुलाल गोटा
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गुलाबी नगरी का गुलाल गोटा बहुत प्रसिद्ध है। होली हो और जयपुर के गुलाल गोटे की बात न हो ऐसा कैसे हो सकता है। चार ग्राम लाख और आठ ग्राम गुलाल...दोनों का संगम पूर्व राज परिवारों से लेकर आम लोगों की पसंद बनता जा रहा है। मणिहारों के रास्ते पर सजी दुकानों से लेकर अॉनलाइन बाजार तक में पसंद किया जा रहा है।
वक्त के साथ ही गुलाल गोटे ने भी कई पुश्तों में हो रहे बदलावों को भी देखा है। हम बताने जा रहे हैं कि ऐसा क्या है गुलाल गोटे में की अब तक इसका वजूद जस की तस बना हुआ है। गुलाल गोटा बनाने के लिए नेशनल अवार्ड जीत चुके आवाज मोहम्मद कहते हैं कि गुलाल गोटा आज ही नहीं बल्कि महाभारत से भी ताल्लुक रखता है। युधिष्ठिर ने इंद्रप्रस्थ महल बनाया, दुर्योधन वहां जमीन को पानी समझ उसमें जा गिरा। इसके साथ ही उसने थाली में सजे फल उठाकर खाए, तो मुंह कड़वा हो गया। दरअसल वो गुलाल गोटे थे।
वे कहते हैं कि पहले जयपुर के पूर्व राजपरिवार को ही गुलाल गोटे दिए जाते थे अब ये आम लोगों के बीच भी खासे प्रसिद्ध हो गए हैं। इनमें भी ये अब अहमदाबाद, मथुरा, वृंदावन समेत देश के कई इलाकों में भेजे जा रहे हैं। ये गुलाल गोटे विदेशों में भी लोग बतौर गिफ्ट भेज रहे हैं। लोग हमसे बड़ी संख्या में ले जाते हैं और आनलाइन बेचते हैं।
आवाज मोहम्मद कहते हैं कि हमारी नौ पीढ़ियां इस काम में लग चुकी है। इसकी खासियत इसका लाख और खालिस अरारोट की गुलाल होती है, जो किसी भी तरह का नुकसान नहीं करती। इसे बनाने के लिए लाख को पहले गर्म करते हैं, फिर फूंकनी की मदद से इसे फुलाकर उसे गुलाल भरकर बंद कर देते हैं। इसे जैसे ही किसी पर फेंका जाता है, लाख की पतली परत टूट जाती है और गुलाल से आदमी सराबोर हो जाता है। वे कहते हैं कि हम इसे गोल आकार के साथ ही अंगूर, सेब, अनार समेत कई आकारों में भी बना चुके हैं।