जयपुर में नगर निगम ग्रेटर की भाजपा मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर को छह साल के लिए पद से हटा दिया गया है। पूर्व नगर निगम कमिश्नर यज्ञमित्र सिंह देव के साथ विवाद को लेकर उन पर यह कार्रवाई की गई है। अगस्त में संयुक्त सचिव विधिक मुदिता भार्गव ने स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) सचिव जोगाराम को इस मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में कथित तौर पर डॉ. सौम्या गुर्जर व तीन पार्षद पारस जैन, अजय सिंह और शंकर शर्मा को दोषी माना गया था। इसी आधार पर स्वायत्त शासन विभाग ने यह कार्रवाई की है।
पिछले साल जयपुर ग्रेटर नगर निगम मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर और तत्कालीन कमिश्नर यज्ञमित्र देवसिंह के भी बीच कचरा उठाने वाली कंपनी बीवीजी को लेकर विवाद हुआ था। मेयर सौम्या गुर्जर व पार्षदों पर निगम की बैठक में कमिश्नर यज्ञमित्र सिंह को अपशब्द कहने और धक्का-मुक्की करने का आरोप लगा। मामले में 6 जून 2021 को राजस्थान सरकार ने जयपुर मेयर सौम्या गुर्जर, वार्ड 39 पार्षद अजय सिंह चौहान, वार्ड 72 पार्षद पारस जैन और वार्ड 103 पार्षद शंकर शर्मा को निलंबित कर दिया था। राजस्थान में यह पहली बार हुआ था जब किसी मेयर को निलंबित किया गया।
जयपुर नगर निगम ग्रेटर की मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर को निलंबन कर उनके खिलाफ न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे। फिर भाजपा की ही शील धाभाई को जयपुर नगर निगम ग्रेटर का कार्यवाहक मेयर बनाया गया। निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी। एक फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्टे दिया तब सौम्या गुर्जर वापस मेयर की कुर्सी पर बैठी थीं।
फरवरी 2021 में जयपुर नगर निगम ग्रेटर की मेयर सौम्या गुर्जर उस वक्त भी चर्चा में आई जब ये प्रसव से आठ घंटे पहले तक बैठक ले रही थीं। प्रसव के तीन दिन बाद ही घर पर कार्यालय की फाइल देखने लगीं और दस दिन बाद कार्यालय भी आने लगी थीं। सौम्या गुर्जर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट शेयर कर लिखा भी था कि 'Work is Worship! देर रात तक निगम ऑफिस में मीटिंग ली। प्रसव पीड़ा शुरू होने पर रात्रि 12:30 बजे कुकुन हॉस्पिटल में भर्ती हुई और सुबह 5.14 पर परमपिता परमेश्वर की कृपा से पुत्र को जन्म दिया। मैं और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।'