दौसा में एक घर के बाहर लिखा 'मैं गरीब हूं'
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बीपीएल परिवारों के घरों के बाहर 'मैं गरीब हूं' लिखने के बहुचर्चित मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग गम्भीर माना है। मानवाधिकार आयोग ने मामले में संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में राजस्थान के मुख्य सचिव ओ.पी. मीना को नोटिस भेजा है और लिखित में जवाब मांगा है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने 'गरीबी का ऐसा मजाक, मैं गरीब हूं' शीर्षक के जरिये समाचार प्रसारित कर मामले को उजागर किया था। जिसमें बताया गया था कि राजस्थान की राजधानी जयपुर से केवल 60 किलोमीटर दूर ही दौसा जिले में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां गरीबों की गरीबी ही उनके सामाजिक जीवन पर अभिशाप साबित हो रही है।
इसके बाद सरकार ने सफाई दी थी कि सरकार ने कलक्टरों को घरों के बाहर ऐसा लिखने के कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा था कि मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अपनी सफाई में राठौड़ ने कहा था कि गरीब बीपीएल परिवारों को सही लाभ देने के लिए तत्कालीन सरकार ने 6 अगस्त 2009 और 6 जुलाई 2011 को बीपीएल परिवार का नाम व क्रमांक संख्या लिखने के आदेश जारी किए थे।