बोफोर्स तोप अभी तक भारतीय सेना का प्रमुख अस्त्र रही है। कारगिल युद्ध में इस तोप का अहम योगदान रहा है। लेकिन बदलते परिवेश में सेना को आधुनिक हथियारों की आवश्यकता है जिसमें अमेरिका की हॉवित्जर तोप खरी उतरती है।
जैसलमेर के पोकरण में हॉवित्जर तोप के परीक्षण के बाद इन्हें कश्मीर में तैनात किए जाने की संभावना है। पिछले वर्ष हुए रक्षा सौदे के मुताबिक भारत को 145 हॉवित्जर तोप मिलेंगी। करीब पांच हजार करोड़ के इस रक्षा सौदे के अंतर्गत दो तोप परीक्षण के लिए लाई गई हैं। जिन्हें विशेष विमान से दिल्ली लाया गया है। गौरतलब है कि भारत अमेरिका से 145 तोप खरीदेगा। पिछले वर्ष भारत और अमेरिका के बीच 145 तोप के लिए समझौता हुआ था।
हॉवित्जर तोप की ये हैं खासियतें —
— भारतीय सेना में सम्मलित होने जा रही हॉवित्जर तोप बोफोर्स के मुकाबले बहुत हल्की हैं। जहां बोफोर्स तोप का वजन करीब 13 टन है वही हॉवित्जर का वजन चार टन ही है।
— हॉवित्जर को हेल्किॉप्टर के माध्यम से आसानी से पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। गौरतलब है कि चीन और पाकिस्तान के भारतीय सीमा पहाड़ी क्षेत्र में काफी दूरी तक है।
— जानकारी के अनुसार भारत को मिलने वाली 145 हॉवित्जर तोप में से 25 तोप भारत को तैयार मिलेंगेी जबकि बाकी का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।
— हॉवित्जर तोप आधुनिक तकनीक से लैस है इसलिए इस आॅपरेट करने के लिए केवल चार—पांच सैनिकों की ही आवश्यकता होगी।
— जहां बोफोर्स की मारक क्षमता 20—25 किलोमीटर है वहीं हॉवित्जर की मारक क्षमता 40 किलोमीटर तक बतायी जा रही है।
— रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार हॉवित्जर तोप से एक मिनट में पांच गोले दागे जा सकते है जबकि बोफोर्स तोप से इतनी समयावधि में केवल दो गोले ही दागे जा सकते है।