अवैध वाहनों के संचालन और परिवहन विभाग की लापरवाही को लेकर सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने अवैध वाहनों पर कार्रवाई न कर पाने की स्थिति में परिवहन आयुक्त व आरटीओ सीकर को अगली सुनवाई पर हाजिर होने के लिए कहा है।
मामला जयपुर से बीकानेर बिना परमिट के चलने वाली बसों से जुड़ा है। केंद्रीय सरकारी बस स्टैंड सिंधी कैम्प के बाहर से ही निजी बस संचालक सवारियों को बिना किसी वैध परमिट के बैठा लेते हैं और बीकानेर तक छोड़ते हैं। जो गैरकानूनी है।
इस संबंध में सुरेंद्र कुमार पारीक की अवमानना याचिका पर हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2016 को कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही कार्रवाई का ब्यौरा लेकर आरटीओ सीकर व बीकानेर को पेश होने के लिए कहा था। सोमवार को पेश होकर आरटीओ सीकर ने कोर्ट के सामने पिछले दिनों की गई कार्रवाई और चालानों का ब्यौरा पेश किया। कोर्ट ने इन कार्रवाई को अपर्याप्त मानते हुए गंभीर होकर अवैध वाहनों के खिलाफ आज से ही कार्रवाई आरंभ करने के लिए कहा है।
न्यायाधीश महेशचंद शर्मा ने दिया आदेश है कि आरटीओ सीकर या तो तुरंत प्रभाव से कार्रवाई शुरू करें। ऐसा नहीं होने पर 20 अप्रेल को परिवहन आयुक्त और आरटीओ सीकर कोर्ट में पेश हों। उन्होंने कहा कि अवैध वाहनों से रोडवेज को भी हो रहा नुकसान हो रहा है। सिंधी कैम्प से निकलने में ही कई घंटे लग जाते हैं।