पार्किंग शुल्क पर्ची : गोले में लिखा नगर निगम चोरी के लिए जिम्मेदार नहीं
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उदयपुर में दो दिन पहले जिस पार्किंग का उद्घाटन गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया ने किया है वहां से यदि उनकी गाड़ी चोरी हो जाती तो उसकी जिम्मेदारी पार्किंग ठेकेदार की नहीं स्वयं गृहमंत्री कटारिया की होती। कटारिया ने यहां गाड़ी पार्क करने के एवज में तय शुल्क भी दिया था।
यह स्थिति इस पार्किंग ठेकेदार के अजीबो—गरीब फरमान की वजह से बनती। दरअसल ठेकेदार ने पार्किंग शुल्क लेने के बाद सभी तरह की जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसा हथकंडा अपनाया है। उसने पार्किंग शुल्क लेने के एवज में दी जानी वाली पर्ची पर अंकित कर रखा है कि यदि पर्ची खो जाती है तो वह उसके लिए 100 रुपए लेगा। लेकिन, यदि गाड़ी चोरी हो जाती है या अन्य प्रकार से उसे यहां खड़े रहते नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं वाहन मालिक की होगी।
इस बात को लेकर यहां पार्किंग करने वाले भी सवाल उठा रहे है कि जब यहां पार्किंग से गाड़ी चोरी होने की जिम्मेदारी ही तय नहीं है तो क्यों करोड़ों रुपए से निर्मित अत्याधुनिक पार्किंग की व्यवस्था चालू की गई। जबकि यहां 16 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। लोगों का यह भी कहना है कि यहां बिना पर्ची के कोई भी उनके वाहन के 100 रुपए फाइन देकर चुराकर भी ले जा सकता है।
नगर निगम मेयर चंद्र सिंह कोठारी भी इतनी बड़ी चूक से खुद को अनभिज्ञ बताते है। हालांकि उन्होंने यह मामला अपने स्तर पर दिखवाने का रटा—रटाया बयान भी दिया है।
वैसे देखा जाए तो ये इश्यू केवल इस पार्किंग स्थल का नहीं है। सरकारी एवं निजी स्तर होने वाले कई सशुल्क पार्किंग ठेकों पर ठेकेदारों ने अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए गली निकाल रखी है। जबकि उपभोक्ता कानून भी कहता है कि जब पैसा लिया है तो सुरक्षा की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की बनती है। जयपुर में एक मामले में तो पुलिस ने पार्किंग स्थल से वाहन चोरी होने पर ठेकेदार को भी अरेस्ट किया था।