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शहीद प्रभु के घर आई नन्ही परी, छलके खुशियों के आंसू

Fri, 16 Jun 2017 02:53 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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शहीद प्रभु की बच्ची - फोटो : अमर उजाला
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पाकिस्तान के सैनिक पिछले वर्ष राजस्थान के जिस सपूत का सिर काट कर सीमा पार ले गए थे, उसके घर नन्हा मेहमान आया है। नन्ही परी के आते ही शहीद की पत्नी, मां व पिता की आंखों में कई महीनों से छलक रहे गम के आंसू की जगह अब जाकर खुशियां नजर आई हैं। शहीद प्रभुसिंह राठौड़ की आई इस निशानी से पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल है।
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राजस्थान के जोधपुर जिले में शेरगढ़ के खिरजां गांव निवासी प्रभुसिंह गत 22 नवम्बर को जम्मू-कश्मीर के माछिल सेक्टर में शहीद हो गए थे। प्रभु सिंह जयपुर यूनिट 13 राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। अब उनके घर आई खुशखबरी ने खुशी में ही चार चांद इसलिए लगा दिए हैं, क्योंकि प्रभुसिंह के स्मारक का अनावरण 26 जून को थल सेना के पूर्व अध्य्क्ष एंव केंद्रीय मंत्री जनरल वी.के. सिंह करने वाले हैं। प्रभुसिंह राठौड़ की पत्नी 21 वर्षीया ओमकंवर ने बुधवार रात जोधपुर के बीजेएस में एक निजी अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया। ओमकंवर के ये दूसरी बेटी है। बड़ी बेटी पलक अभी पौने दो वर्ष की है।

ओमकंवर ने बताया कि प्रभु के प्यार की निशानी के रूप में मेरी छोटी बेटी आई है। असल में, प्रभु के शहीद होने की खबर के बाद मेरे गर्भ में पल रही नन्ही जान ने मुझे सांसे लेते रहने की हिम्मत दी। इधर, अपने इकलौते पुत्र प्रभु सिंह की अर्थी को कंधा देने का बोझ झेल चुके पूर्व सैनिक चंद्र सिंह खुशी से झूम रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरा प्रभु लौट आया है।
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उन्होंने कहा कि प्रभु देश का बेटा था और इसकी निशानी के रूप में आई नन्ही परी से परिवार या समाज ही नहीं, पूरा गांव खुशियां मना रहा है। प्रभु के जाने के बाद इन्ही लोगों ने हिम्मत बंधाई थी।
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जन्मदिन के दिन गांव पहुंचा था शहीद का शव, हुआ था ये

शहीद प्रभु की बच्ची - फोटो : अमर उजाला
प्रभु सिंह का शरीर उनके जन्म दिन के दिन गांव पहुंचा था। ये मंजर शहीद की पत्नी के लिए दिल दहला देने वाला था। जब वीरांगना ओम कंवर ने चीख पुकार करते हुए अंतिम बार पति का चेहरा देखने की जिद की, तो सेना सहित किसी के पास कोई जवाब ही नहीं था। ऐसे में चंद्र सिंह के दखल के बाद प्रभु का अंतिम संस्कार किया गया।

चंद्रसिंह ने बताया कि मेरा परिवार 100 सालों से देश के लिए शहादत दे रहा है और पांच पीढ़ियों से देश सेवा में लगा है। पहली शहादत सन् 1914 में उनके दादा अचल सिंह के दादा भभूत सिंह के बेटे अजीत सिंह ने दी थी। इसके बाद वर्ल्डवार में अचल सिंह के भाई गुलशन सिंह शहीद हुए। प्रभु सिंह के चाचा कैप्टन हरि सिंह भी पूर्व सैनिक रह चुके हैं।
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