18 साल की होने तक उसे यही लगता था कि वह अनाथ है और उसके सिर पर मां-बाप का साया नहीं है। उसका जीवन यहां बालिका गृह में बीत रहा था, लेकिन अचानक किस्मत ने उसे ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया कि उसके पास खुश होने की तो वजह थी, मगर एक बात ऐसी भी थी, जिसने उसे अंदर से झकझोर कर रख दिया।
जयपुर की बालिका गृह में पलकर बड़ी हुई सुकन्या 18 साल बाद अपनी मां से मिली, जिसे उसने कभी नहीं देखा था। अपनी मां से मिलने के बाद जहां सुकन्या की खुशी का ठिकाना नहीं रहा वहां उसकी खुशी ज्यादा देर इसलिए भी नहीं टिक सकी जब उसे यह पता चला कि उसकी मां विमंदित है। सुकन्या को इससे भी बड़ा झटका तब लगा जब उसे पता चला कि उसकी मां का दुष्कर्म हुआ था और वह उसी दुष्कर्मी पिता की संतान है। इसके बाद सुकन्या ने अपने पिता को भी ढूंढ निकाला।
सुकन्या एेसे से पहुंंची पिता तक
सच्चाई सामने आने के बाद 18 वर्षीय सुकन्या ने हौंसला नहीं खोया और उसने उस शख्स तक पहुंचने की ठान ली, जो उसका और उसकी मां का गुनहगार था। सुकन्या को उसके मां बाप से मिलाने में कोर्ट ने भी अहम भूमिका निभाते हुए उसका साथ दिया। कोर्ट ने जवाहर नगर पुलिस को सुकन्या के असली पिता का पता लगाने के लिए 2016 में डीएनए जांच कराने के आदेश दिए थे।
बात वर्ष 1987 की है जब सुकन्या की मां लावारिस हालत में मिली थी जिसे विमंदित गृह लाया गया था। विमंदित गृह में करीब 7 साल बीत जाने के बाद सुकन्या की मां के गर्भवति होने का पता चला। इस घटना के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और विमंदित गृह के अधिकारियों ने पुलिस में मामला दर्ज कराया।
जांच में खुलासा होने के बाद मालूम चला कि विभाग के ही कर्मचारी महिला कर्मचारियों से सांठ-गांठ कर विमंदित गृह की महिलाओं से दुष्कर्म करते थे। पुलिस ने इस मामले में विभाग के कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक सुकन्या की मां के साथ दुष्कर्म करने वाला उसका पिता भी था। मामला खुलने के बाद सुकन्या के पिता को कोर्ट ने 5 साल के लिए जेल भेज दिया था। इस कर्मचारी से ही सुकन्या का डीएनए मैच हुआ।