मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुफ्त बिजली योजना को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जबरदस्त करंट लग सकता है। दरअसल, राजस्थान डिस्कॉम कंपनियां पहले ही घाटे में हैं और अब सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान डिस्कॉम कंपनियों को अडाणी समूह को 4000 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बजट घोषणा की आकर्षक योजनाओं में से एक मुफ्त बिजली को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जबरदस्त करंट लग सकता है। कोयला को लेकर अडानी पावर के साथ चल रहे विवाद को सुप्रीम कोर्ट ने खत्म करते हुए चार राजस्थान डिस्कॉम कंपनियों को 4000 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि तीन बिजली खुदरा विक्रेताओं को अडानी पावर को चार सप्ताह के भीतर पैसे का भुगतान करना होगा, ताकि 2013 से बकाया भुगतान को समाप्त किया जा सके।
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पहले से ही घाटे में चल रही डिस्कॉम कंपनियां इस अतिरिक्त भार को वहन करने की स्थिति में नहीं है। मुख्यमंत्री की मुफ्त बिजली योजना का भार और अब 4000 करोड़ रुपये चुकाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश कहीं ना कहीं 1 करोड़ 48 लाख उपभोक्ताओं की जेब पर ही भारी पड़ने वाला है।
इसे लेकर बीजेपी ने गहलोत सरकार पर हमला बोल दिया है। बीजेपी का कहना है कि राजस्थान में पहले ही बिजली सबसे महंगी है. इस अतिरिक्त भार से उपभोक्ताओं की कमर ही टूट जाएगी। भाजपा ने मुख्यमंत्री की मुफ्त बिजली योजना को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। भाजपा ने कहा कि अब मुख्यमंत्री की मुफ्त बिजली योजना किस प्रकार लागू होगी।
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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद अडाणी समूह के शेयर में भारी उछाल आई थी। कंपनी के शेयरों में 25 फरवरी को 12 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। शुक्रवार को कंपनी के शेयर 12.15 फीसदी की तेजी यानी 123.30 रुपये पर बंद हुए थे।