राजस्थान में डॉक्टर्स की 12 दिन से चल रही हड़ताल आज शाम समाप्त हो गई। कल से डॉक्टर काम पर लौट आएंगे।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अध्यक्ष अशोक परनामी ने बताया कि बातचीत सकारात्मक रही। उन्होंने समझौते की जानकारी देते हुए बताया कि चिकित्सकों की सभी मांगें मान ली गई हैं। डॉक्टर्स की इन प्रमुख मांगों को पूरी करने की घोषणा राज्य सरकार ने की हैं—
सामूहिक अवकाश की अवधि को उपार्जित अवकाश में समायोजन किया जाएगा।
रेस्मा के तहत दर्ज प्रकरणों में वर्ष 2011 के उपरांत राज्य सरकार के अनुरूप अपनाई गई प्रक्रिया के अनुरूप सभी प्रकरण वापस।
प्रशासनिक विभागीय कार्रवाई समाप्त की जाएगी।
12 नवम्बर को हुए समझौते को शत प्रतिशत लागू किया जाएगा।
बिंदू संख्या 6 के अनुसार अतिरिक्त निदेशक के पद पर चिकित्सक पदस्थापित किया जाएगा।
पिछले समझौते के डीएसीपी के आदेश पर विरोधाभास पाए जाने पर परीक्षण मंत्रिमंडलीय उपसमिति द्वारा किया जाएगा।
डॉ.अजय चौधरी की करौली में किया तबादला रद्द किया जाएगा। उन्हें सीकर सीएमएचओ पद पर लगाया जाएगा।
रेजीडेंट डॉक्टरों का कोई मांग पत्र नहीं था, लेकिन मांगों पर विचार करते हुए सभी मांगें मानीं। सभी का तबादला में संशोधन करेंगे।
आठ घंटे में कई बार बना समझौता पत्र
एक सरकारी अस्पताल में खाली पड़ा डॉक्टर का चेंबर और बाहर लाइन में लगे मरीज
- फोटो : Amar Ujala
जयपुर के झालाना स्थित सीफू कार्यालय में समझौता वार्ता दोपहर करीब एक बजे शुरू हुई। इस बैठक में चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ, परिवहन मंत्री यूनुस खान, स्वास्थ्य राज्य मंत्री बंशीधर बाजिया, सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और सरकारी अधिकारी मौजूद थे।
जानकारी के अनुसार, इस दौरान पांच बार समझौता पत्र तैयार हुआ। वार्ता में शामिल सेवारत चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी और संघ के अन्य पदाधिकारियों ने उसे नकार दिया। इस दौरान कई बार मंत्रियों और पदाधिकारियों के बीच अलग-अलग बातचीत भी हुई।
बताया जा रहा है कि प्रमुख गतिरोध डॉ. चौधरी के तबादले और हड़ताली डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर था। इस मामले में अदालती आदेशों को देखते हुए सरकार की ओर से ठोस आश्वासन देने में सरकारी नुमाइंदे पहले आनाकानी करते रहे। बाद में कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने की बात कहते हुए इस पर सहमति बनी।