परिवार पर मुसीबत आई तो ढ़ाल बनकर मासूम बेटी सामने आई। बेटी ने पूरे परिवार का जिम्मा उठाया और अंधे पिता को सहारा दिया।
बेटी के साहस की यह कहानी अनूठी है। अपनी हिम्मत के दम पर ये बेटी न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज की पसंद बन गई है। मामला उदयपुर के मावली तहसील मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर बसे डामरा की मगरी का है। यहां रहने वाला भीमा 10 साल पहले पत्थर की खान में मजूदरी करते समय आंखें खो बैठा था।
इसके बाद परिवार के आर्थिक हालात खराब हो गए। परिवार पर आए संकट में बेटी ने पूरी कमान संभाली। उस समय उसकी बेटी निरमा ने घर की परिस्थितियों से समझौता 10 वर्ष पहले ही पढ़ना छोड़ दिया।