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क्रूड आॅयल चोरी में दो और मास्टरमाइंड गिरफ्तार, अब तक पकड़े 34 आरोपी 

Sun, 01 Oct 2017 06:13 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
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क्रूड आॅयल चोरी प्रकरण - फोटो : Demo pic
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क्रूड आॅयल चोरी के मामले में एसओजी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंग में शामिल दो और आरोपियों को धरदबोचा। ये दोनों फैक्ट्री के मालिक है। 
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यह मामला जुड़ा है राजस्थान के बाड़मेर जिले से। जहां भारी मात्रा में क्रूड आॅयल चोरी होने का मामला सामने आया है। मामले को गंभीरता से देखते हुए राज्य सरकार ने इस माफिया पर लगाम कसने का जिम्मा एसओजी राजस्थान को सौंपा था। एसओजी के आईजी दिनेश एमएन ने बताया कि मुख्य आरोपी गणेशाराम उर्फ जेठाराम और भूर सिंह है। 

एसओजी के एसपी संजय श्रोत्रिय ने बताया कि अब तक क्रूड आॅयल चोरी प्रकरण में 34 लोग गिरफ्तार हो चुके है। एसओजी के नरेंद्र कुमार शर्मा के नेतृत्व में एक टीम बाड़मेर भिजवाई गई थी। जहां से एक मुख्य आरोपी गणेशाराम उर्फ जेठाराम जाट को 28 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। उसे कोर्ट में पेश किया जहां से न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। इसी तरह, आरोपी भूर सिंह को कल गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे एसओजी ने रिमांड पर लिया है। 
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बचने के लिए इस तरह करते थे मिलावट

क्रूड आॅयल चोरी प्रकरण - फोटो : File photo
जानकारी के अनुसार क्रूड आॅयल चोरी गैंग में शामिल टैंकर मालिक और ड्राइवर की मिलीभगत से होती थी। केयर्न वेदांता कंपनी एवं राग आॅयल से अनुबंध पर लगे हुए टैंकरों द्वारा एमपीटी नागाणा पर क्रूड आॅयल व प्रोड्यूस वाटर खाली करने के दौरान केयर्न कंपनी के सर्वेयर, वीटीएस आॅपरेटर, हैल्प, क्यूआरटी टीम स्टॉफ की मिलीभगत से क्रूड आॅयल चुराकर बाड़मेर में खेत​सिंह की प्याउ स्थित मास्टरमाइंड आरोपी गौतम सिंह व भूर सिंह की फैक्ट्री पर खाली कर दिया जाता था।

इसके​ लिए फैक्ट्री पर चोरी के क्रूड आॅयल को इकट्ठा करने के लिए भूमिगत टैंकर बना रखे थें। विशेष रुप से क्रूड को फिल्टर लगे हुए टैंकरों में खाली किया जाता था। इस व्यवसाय को वैधानिक रूप देने के लिए गौतम सिंह ने टायर आॅयल प्लांट फ्लाई इंफ्राटेक के नाम से फैक्ट्री शुरू की थी।

इसी तरह भूरसिंह ने भंवरिया एंड ब्रदर्स के नाम से फैक्ट्री शुरू की। जहां से फर्नेश आॅयल एवं क्रूड आॅयल की चोरी की जा रही थी और फिर ​गिरोह से जुड़े खरीददारों को यह माल बेचा जा रहा था। फैक्ट्री मालिक उनको टायर आॅयल के बिल काटकर माल भेजते थे और क्रूड आॅयल में टायर आॅयल की आंशिक मात्रा मिक्स कर देते थे। जिससे क्रूड आॅयल की पहचान पकड़े जाने पर आसानी से नहीं हो पाती थी। 
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