राजधानी जयपुर में दिनदहाड़े सरस डेयरी के कलेक्शन एजेंट की गोली मारकर हुई हत्या की वारदात ने पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया। जल्द खुलासे के लिए करीब 200 पुलिसकर्मियों की 10 टीमें गठित की गई। वारदात में प्रयुक्त एक बिना नंबर हंक बाइक को तलाशने के लिए ऐसी बाइक बनानी वाली कंपनियों की करीब 1200 मोटरसाइकिलों के रिकार्ड खंगाले गए।
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शहर में लगे सीसीटीवी की फुटेज देखी गईं। तब फुटेज में एक संदिग्ध और बाइक नजर आई। इसके बाद पुलिस ने हत्या के मास्टरमाइंड और उसके तीन साथियों को धरदबोचा। इसमें कमिश्नरेट की स्पेशल क्राइम ब्रांच टीम और कोतवाली सर्किल के एक कांस्टेबल ने अहम रोल निभाया।
जयपुर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी अंकित सैनी निवासी गोविंदपुरी सोढाला है, जो कि वारदात का मास्टरमाइंड है। इसके अलावा शुभम चौधरी उम्र 19 साल निवासी राजहंस कॉलोनी, स्कीम नंबर 3 ब्रह्मपुरी है। यह 11 वीं कक्षा का छात्र है। तीसरा आरोपी यश सिंह उम्र 18 साल निवासी बिहार हाल गया गुरु की गली, ब्रह्मपुरी बस स्टैंड है। जबकि चौथा आरोपी सुनील कोली उम्र 22 साल निवासी जोशी कॉलोनी, ब्रह्मपुरी है।
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आर्थिक तंगी से उबरने के लिए एक महिने तक रैकी
मृतक ओमप्रकाश
- फोटो : File photo
पूछताछ में सामने आया कि मास्टरमाइंड अंकित सैनी का रामनगर, सोढाला में डेयरी बूथ है। आरोपी शुभम चौधरी पहले रामनगर सोढाला में रहता था। इसके चलते शुभम की अंकित से जान-पहचान थी। गलत शौक पूरा करने के लिए शुभम और उसके दोस्तों को रुपयों की जरूरत थी।
अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि आर्थिक तंगी से उबरने के लिए अंकित ने वारदात में शामिल साथियों को सरस डेयरी के कलेक्शन एजेंट ओमप्रकाश शर्मा के बारे में जानकारी दी और फिर उससे लूटपाट की योजना बनाई।
अंकित ने गिरोह के साथियों को यह भी बताया कि मृतक ओमप्रकाश के पास सोमवार को सबसे ज्यादा केश कलेक्शन होना बताया। तब आरोपी छात्र शुभम, यश सिंह और सुनील कोली ने करीब एक महिने तक ओमप्रकाश की रैकी की और आखिरकार 8 जनवरी सोमवार को शुभम, सुनील और यश सिंह अपने दोस्त की हंक बाइक, एक पिस्टल और बेसबॉल का डंडा लेकर सोढाला पहुंचे।
वहां नंदपुरी की एक सूनी गली में दोपहर करीब साढ़े 12 बजे तीनों लुटेरों ने ओमप्रकाश के सिर पर डंडे से वारकर बैग लूटने की कोशिश की। लेकिन उसने बैग नहीं छोड़ा तो शुभम ने उसे गोली मार हत्या कर दी। इसके बाद बैग में रखे 1 लाख रुपए लूटे और वहां से फरार हो गए।
वारदात के बाद अंकित मौके पर पहुंचकर पुलिस की गतिविधियों की सूचना गैंग के साथियों को देता रहा। वारदात के बाद डीसीपी क्राइम डॉ. विकास पाठक, डीसीपी योगेश दाधीच, एसीपी नेमसिंह चौहान और सीआईयू टीम प्रभारी मनोज चौधरी के निर्देशन में 10 टीमें गठित की गई। इसमें करीब 200 पुलिसकर्मियों की टीम को हत्यारों की तलाश में लगाया गया।
सीसीटीवी फुटेज में हंक बाइक सामने आने पर करीब 1200 ऐसी मोटरसाइकिलों के रिकार्ड खंगाले गए। तभी कोतवाली सर्किल के कांस्टेबल शमशेर और सीआईयू टीम को सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर से अहम सुराग मिला। इसके बाद पुलिस टीम ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।