एक बार फिर बेटी संकट में थी। परिवार वालों ने मासूम को गोबर के ढेर में दबा दिया ताकि वह जी नहीं सके। लेकिन, ईश्वर का कुछ और मंजूर था। गांव वालों की नजर उस पर पड़ गई और उन्होंने उसे बचा लिया।
मामला बांसवाड़ा से 40 किलोमीटर दूर कलिंजरा कस्बे के हमीरपुर गांव का है। यहां एक स्थान पर गोबर के ढेर में बच्ची के पांव देखकर वहां से गुजर रहे ग्रामीण ठिठक गए। उन्होंने उसे बाहर निकाला तो उसकी सांस चल रही थी। तुरंत उसे स्थानीय एमजी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची के शरीर पर चोट के कुछ निशान भी है जिससे उसके शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
गोबर में दबे रहने के बावजूद बच्ची के जीवित बचे रहने की घटना पर डॉक्टरों ने भी हैरानी जताई है। कई घंटो तक गोबर में दबे रहने के कारण बच्ची की हालत थोड़ी खराब है और उसके हाथ पैर भी पीले पड़ गए हैं।
उधर, इस बेटी की जान का संकट में डालने वाले मां—बाप का अभी पता नहीं चला है। संभवत: बेटी होने के कारण परिजनों ने इसे मारने के इरादे से गोबर में दबा दिया। माता—पिता की तलाश की जा रही है। फिलहाल अस्पताल का स्टाफ और ग्रामीण इसकी देखभाल कर रहे है।