प्रदेश में एक और बाबा की वजह से एक ही परिवार के पांच सदस्यों की जान चली गई। प्रोपर्टी कारोबारी के पांच सदस्यीय परिवार की बीते दिन सामूहिक खुदकुशी की घटना से पहले लिखे गए सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने आरोपी बाबा विशंभरदास को आज शाम गिरफ्तार कर लिया।
विशंभरदास के खिलाफ मृतक प्रोपर्टी कारोबारी डूंगरमल के भाई नथमल ने करधनी थाने में खुदकुशी के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करवाया है। मामले का अनुसंधान करधनी थानाप्रभारी अनिल जसोरिया व सबइंस्पेक्टर विनोद कुमार कर रहे हैं।
डीसीपी पश्चिम अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि आरोपी विशंभरदास महल योजना, जगतपुरा स्थित श्रीजानकी सीताराम मंदिर का महंत है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि विशंभरदास ने सामूहिक खुदकुशी के दो दिन पहले ही अपने मोबाइल फोन की सिम क्यों तोड़ी। साथ ही, उसने मृतक प्रोपर्टी कारोबारी डूंगरमल से कब और कितने रुपए लिए थे। उनके बीच नजदीकियां कैसे बढ़ी। इसे जानने में भी पुलिस जुटी हुई है।
सुसाइड नोट में इन बातों का जिक्र
सामूहिक खुदकुशी के बाद लोगों की भीड़
- फोटो : Amar Ujala
गौरतलब है कि करधनी निवासी 45 वर्षीय प्रोपर्टी कारोबारी डूंगरमल ने अपनी पत्नी सुमन (41) और बेटी खुशी (14) खुशी व बेटा जितेंद्र (21) और पांचवें सदस्य बेटे धर्मेंद्र (16) के साथ मिलकर कल जहर खाकर सामूहिक खुदकुशी कर ली थी। परिजनों ने डूंगरमल, उसकी पत्नी सुमन, बड़े बेटे जितेंद्र और बेटी खुशी की मौत के बाद उनकी आंखें दान कर दी।
पुलिस के मुताबिक डूंगरमल ने सामूहिक खुदकुशी से पहले सुसाइड नोट में लिखा- महंत ने लिए पैसे, लौटा नहीं रहा, इसलिए हम 5 आदमी मर रहे हैं। डूंगरमल ने सुसाइड नोट में लिखा... मैं और परिवार के पांच आदमी आज मर रहे हैं। उसका जिम्मेदार महल योजना जगतपुरा श्रीजानकी सीताराम मंदिर का महंत विशंभरदास है।
5 साल पहले मैंने लोगों से पैसे लाकर उसे दिए थे, लेकिन वह लौटा नहीं रहा। लेनदार पीछे पड़े हैं। भगवान हमें माफ करे। मेरे पास दूसरा कोई चारा नहीं था कि लोगों को पैसे चुकाता।
रहने लगा था घर से बाहर
कमरे में मिली जहरीली गोलियों के पाउच
- फोटो : Amar Ujala
इसके बाद पुलिस ने सुसाइड नोट में नाम व पते के आधार पर विशंभरदास को शाम को हिरासत में ले लिया और उससे आज भी पूछताछ की जा रही है। डूंगरमल के परिजनों व नजदीकी लोगों ने बताया कि डूंगरमल ने ही सर्वोदय एनक्लेव कॉलोनी को बसाया था। नोटबंदी के बाद उसे प्रॉपर्टी कारोबार में करीब 60 लाख का घाटा हुआ था।
उसने जिन लोगों से कर्ज लिया था, वे करीब रोज ही पैसे मांगने के लिए घर आया करते थे। फोन कर धमकाते थे। डूंगरमल का आरोप था कि उसने कई लोगों से ली हुई मोटी रकम महंत विशंभरदास को दी थी। जिसे महंत लौटा नहीं रहा था। डूंगरमल ने जिन लोगों को चेक दिए वो बाउंस हो गए। इससे वह अक्सर घर से बाहर रहता था।