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मासूम से गैंगरेप मामले में बाल संरक्षण आयोग ने लिया प्रसंज्ञान, एसपी से मांगी रिपोर्ट

Sat, 16 Sep 2017 08:08 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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केंद्रीय विद्यालय में मासूम से गैंगरेप के मामले में राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रसंज्ञान लेते हुए बाड़मेर के एसपी और सीएमएचओ को तलब किया है। उधर, इस मामले में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद बालिका के पिता ने न्याय की गुहार लगाई है। 
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गुरुग्राम के रायन स्कूल में मासूम के साथ कुकर्म का प्रयास और हत्या के मामले के बाद राजस्थान के बाड़मेर स्थित जालीपा केन्द्रीय विद्यालय में बालिका से गैंगरेप का मामला सामने आया है। राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी ने मामले में प्रसंज्ञान लेते हुए बाड़मेर पुलिस अधीक्षक और प्रमुख चिकित्साधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, घटना के हर पहलू पर जांच करने को कहा है। 

दूसरी तरफ बालिका से गैंगरेप की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर निजी डॉक्टर और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में भी विरोधाभास सामने आ रहा है। मासूम का पहला मेडिकल करने वाले डॉक्टर के अनुसार बालिका के निजी अंगों पर चोट आई हैं। उधर, मेडिकल बोर्ड मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में बालिका को फंगल इंफेक्शन बताया गया है। 
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पिता ने लगाई न्याय की गुहार

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मासूम के पिता का कहना है सबसे पहले वह उसे एक निजी अस्पताल में लेकर गए, जहां पहले ही चेकअप में डॉ. मेघा वैष्णव को मासूम के साथ दुष्कर्म का अंदेशा हुआ। जिसके बाद डॉक्टर ने पुलिस को इसकी सूचना दी। जबकि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में बालिका को फंगल इंफेक्शन होने की बात कही गई है। ऐसे में पिता ने न्याय की गुहार लगाई है और कहा है कि सच सबके सामने आना चाहिए।

उधर, बाड़मेर एसपी डॉ. गगनदीप सिंगला का कहना है कि रिपोर्ट के अनुसार सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज कर लिया है, मामले की जांच चल रही है। दो सफाई कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। मेडिकल रिपोर्ट में अंदरूनी चोट नहीं आई है। पुलिस ने एफएसएल जांच के लिए नमूने भेजे हैं। मासूम की काउंसलिंग के लिए प्रोफेशनल काउंसलर को बुलाया गया है।
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पूर्व सांसद ने ये लगाए आरोप

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वहीं, घटना से गुस्साए एबीवीपी छात्र संघ ने जिला कलक्टर शिवप्रसाद नकाते को उनके आवास पर ज्ञापन सौंपा है। इसमें उन्होंने दुष्कर्म के आरोपियों को जल्द गिरफ्तार  करने की मांग की है।

पूर्व सांसद बाड़मेर हरीश चौधरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना के 24 घंटे बाद पुलिस एफआईआर दर्ज करती है, यह अपने आप में संदेह पैदा करता है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश है कि नाबालिग पीड़िता के मामले में उसके बयान ही काफी है। इसके बावजूद मेडिकल रिपोर्ट में साक्ष्यों छुपाने के लिए दबाव बनाकर छेड़छाड़ की गई।
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