राजस्थान प्रदेश में अपराध के ग्राफ में निरंतर कमी आ रही है। वहीं, पुलिस की मुस्तैदी की वजह से गंभीर और संगीन अपराधिक वारदातों का खुलासा भी हुआ है। यह कहना है कि प्रदेश के पुलिस मुखिया डीजीपी ओपी गल्होत्रा का। उन्होंने आज वर्षवार क्राइम रेट संबंधित आंकड़ें जारी किए।
इसमें बताया गया कि पुलिस की सदैव प्राथमिकता यही रहती है कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ बनी रहे तथा आमजन में शांति का माहौल बना रहे। इसमें राज्य की पुलिस सफल रही है।
डीजीपी ने भारतीय दण्ड संहिता के तहत विभिन्न अपराधों मे कमी आने का दावा करते हुए बताया कि आईपीसी के अपराधों में वर्ष 2015 में 2014 की अपेक्षा डकैती को छोड़कर सभी अपराधों में 5.86 प्रतिशत की कमी आई। वर्ष 2016 में वर्ष 2015 की अपेक्षा बलात्कार के मुकदमों को छोड़कर अन्य सभी अपराधों में 8.93 प्रतिशत की कमी रही है।
अपराधों में लगातार कमी आई
इसी तरह वर्ष 2017 में वर्ष 2016 की अपेक्षा चोरी व बलवा को छोड़कर अन्य सभी संगीन अपराधों में 5.79 प्रतिशत की कमी आई। इस प्रकार राज्य में आईपीसी के अपराधों में वर्ष 2015 से अब तक लगातार कमी आई है।
डीजीपी के मुताबिक राज्य में स्थानीय एवं विशेष अधिनियम के अपराधों में वर्ष 2015 में 2014 की अपेक्षा एक्साईज एक्ट, जुआ एक्ट, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट एवं एक्सप्लोजिव एक्ट सहित स्थानीय एवं विशेष अधिनियमों में 10.24 प्रतिशत की वृद्धि रही है।
वर्ष 2016 में वर्ष 2015 की अपेक्षा उपरोक्त सभी अपराधों में 10.38 प्रतिशत की वृद्धि रही है। वर्ष 2017 में वर्ष 2016 की अपेक्षा शस्त्र अधिनियम को छोड़कर शेष सभी अपराधों में 6.87 प्रतिशत की वृद्धि रही है। इस प्रकार राज्य में स्थानीय एवं विशेष अधिनियम के अपराधों में वर्ष 2015 से अब तक लगातार वृद्धि रही है।
महिला अत्याचार से सम्बन्धित अपराधों में भी गिरावट
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डीजीपी गल्होत्रा के मुताबिक प्रदेश में महिला अत्याचार से सम्बन्धित अपराधों में भी गिरावट आई है। डीजीपी ने बताया कि महिला अत्याचार से संबंधित अपराधों में वर्ष 2016 में 2015 की अपेक्षा कुल अपराधों में 2.58 प्रतिशत की कमी रही है जबकि वर्ष 2017 में वर्ष 2016 की अपेक्षा कुल अपराधों में 9.79 प्रतिशत की कमी रही है।
इसी तरह अनुसूचित जाति अत्याचार से संबंधित अपराधों में वर्ष 2016 में 2015 की अपेक्षा कुल अपराधों में 13.13 प्रतिशत की कमी रही है। जबकि वर्ष 2017 में वर्ष 2016 की अपेक्षा कुल अपराधों में 21.21 प्रतिशत की कमी रही है।
अनुसूचित जनजाति अत्याचार से संबंधित अपराधों में वर्ष 2016 में 2015 की अपेक्षा कुल अपराधों में 15.12 प्रतिशत की कमी रही है जबकि वर्ष 2017 में वर्ष 2016 की अपेक्षा कुल अपराधों में 18.48 प्रतिशत की कमी रही है।